"राधाचरण गोस्‍वामी": अवतरणों में अंतर

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:''‘‘मैं एक कट्टर वैष्णव हिन्दू हूँ। अन्य धर्म अथवा समाज के लोगों से विरोध करना उचित नहीं समझता। बहुत से [[आर्य समाज|आर्यसमाजी]], [[ब्रह्म समाज|ब्रह्म समाजी]], मुसलमान, ईसाई मेरे सच्चे मित्र हैं और बहुधा इनके समाजों में जाता हूँ।’’''
 
गोस्वामी जी [[विधवा]] विवाह के कट्टर समर्थक थे। उन्होंने अनेक असहाय बाल विधवाओं के पुनर्विवाह स्वयं पिता बनकर कराया थे। उनके विरोधी एतदर्थ उन पर अवांछित आक्षेप भी करते थे। विधवा विवाह के समर्थन में विविध पत्र-पत्रिकाओं में उन्होंने अनेक विचारोत्तेजक लेख लिखे। विधवा विवाह के पक्ष में उन्होंने ‘विधवा विपत्ति’ और ‘बाल विधवा’ शीर्षक दो [[उपन्यास]] भी लिखे थे।
 
==साहित्य सेवा==
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