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लाल बलुआ पत्थर एवं संगमर्मर से निर्मित यह आकर्षक एवं भव्य दुर्ग पहाड़ी के चार स्तरों पर बना हुआ है, जिसमें से प्रत्येक में विशाल प्रांगण हैं। इसमें दीवान-ए-आम अर्थात जन साधारण का प्रांगण, दीवान-ए-खास अर्थात विशिष्ट प्रांगण, शीश महल या जय मन्दिर एवं सुख निवास आदि भाग हैं। सुख निवास भाग में जल धाराओं से कृत्रिम रूप से बना शीतल वातावरण यहां की भीषण ग्रीष्म-ऋतु में अत्यानन्ददायक होता था। यह महल कछवाहा [[राजपूत]] महाराजाओं एवं उनके परिवारों का निवास स्थान हुआ करता था। दुर्ग के भीतर महल के मुख्य प्रवेश द्वार के निकट ही इनकी आराध्या चैतन्य पंथ की [[देवी शिला]] को समर्पित एक मन्दिर बना है। आमेर एवं [[जयगढ़ दुर्ग]] [[अरावली पर्वतमाला]] के एक पर्वत के ऊपर ही बने हुए हैं व एक गुप्त पहाड़ी सुरंग के मार्ग से जुड़े हुए हैं।
 
[[फ्नोम पेन्ह]], [[कम्बोडिया]] में वर्ष २०१३ में आयोजित हुए [[विश्व धरोहर समिति]] के ३७वें सत्र में राजस्थान के पांच अन्य दर्गों सहित आमेर दुर्ग को [[:w:Hillराजस्थान Fortsके ofपहाड़ी Rajasthanदुर्ग|राजस्थान के पर्वतीय दुर्गों]] के भाग के रूप में [[युनेस्को विश्व धरोहर स्थल]] घोषित किया गया है।
 
== नाम व्युत्पत्ति ==