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=== गणित ===
==== स्थानीय मान प्रणाली और शून्य ====
[[स्थान मान|स्थान-मूल्य]] अंक प्रणाली, जिसे सर्वप्रथम तीसरी सदी की [[बख्शाली पाण्डुलिपि]] में देखा गया, उनके कार्यों में स्पष्ट रूप से विद्यमान थी।<ref>पी.जेड. इन्गर्मान, 'पाणिनि-बाक्स फॉर्म', एसीएम् के संचार १०(३)(१९६७), पी.१३७</ref> उन्होंने निश्चित रूप से प्रतीक का उपयोग नहीं किया, परन्तु फ्रांसीसी गणितज्ञ [[जार्ज इफ्राह|जार्ज इफ्रह]] कीके दलील है किमतानुसार- रिक्त गुणांक के साथ, दस की घात के लिए एक स्थान धारक के रूप में शून्य का ज्ञान आर्यभट के स्थान-मूल्य अंक प्रणाली में निहित था।<ref>
{{cite book
| title = G Ifrah
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