"ब्रह्मपुत्र नदी" के अवतरणों में अंतर

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== कहानी ==
ब्रह्मपुत्र हमारे हिन्दू भगवान ब्रह्मा का पुत्र है।
आज के समय मे ब्रह्मपुत्र के बारे मे अत्याधिक कहानियाँ प्रचलित है, पर ब्रह्मपुत्र के बारे में सबसे अधिक प्रचलित कहानी "कलिका पुराण" मे मिलती है।
यह समझा जाता है कि परशुराम, भगवान विष्णु के एक अवतार जिन्होनेने अपनी माता को फरसे के सहारे मारने के पाप का पश्चाताप एक पवित्र नदी मे नहाकर किया। अपनेपरशुराम ने पिता के एक कथन के मान के कारण (उनकेपरशुराम के पिता ने उनकीपरशुराम की माता पर शक किया) इसलिये उन्होनेपरशुराम ने एक फरसे के सहारे अपनी माता का शीश धङ से अलग कर दिया। इस कारण वह फरसा उनकेपरशुराम के हाथ से ही चिपक गया।
अनेक मुनियों की सलाह से वहपरशुराम ने अनेक आश्र्म गये उनमे से एक था "परशुरम कुन्द्"आश्रम था तभितभी से वह महनदि कुनद अनेक पहाडियों से घीरा है। परशुराम ने उन्मे से एक पहाड़ी को तोड कर लोगो के लिये उस पवित्र पानी को निकाला। इस कारण परशुराम का फरसा उनकेपरशुराम के हाथ से निकल गया। इस कारण उन्हें परशुराम को लगा कि वह पाप से मुक्त है।
 
== नदी की लम्बाई (किलोमीटर मे) ==
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