"ब्रह्मपुत्र नदी" के अवतरणों में अंतर

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== कहानी ==
ब्रह्मपुत्र हमारे हिन्दू भगवान ब्रह्मा का पुत्र है।
आज के समय मे ब्रह्मपुत्र के बारे मे अत्याधिक कहानियाँ प्रचलित है, पर ब्रह्मपुत्र के बारे में सबसे अधिक प्रचलित कहानी "कलिका पुराण" मे मिलती है।
यह समझा जाता है कि परशुराम, भगवान विष्णु के एक अवतार नेजिन्होने अपनी माता को फरसे के सहारे मारने के पाप का पश्चाताप एक पवित्र नदी मे नहाकर किया। परशुराम नेअपने पिता के एक कथन के मान के कारण (परशुराम केउनके पिता ने परशुराम कीउनकी माता पर शक किया) इसलिये परशुराम नेउन्होने एक फरसे के सहारे अपनी माता का शीश धङ से अलग कर दिया। इस कारण वह फरसा परशुराम केउनके हाथ से ही चिपक गया।
अनेक मुनियों की सलाह से परशुराम नेवह अनेक आश्र्म गये उनमे से एक था "परशुरम कुन्द्"आश्रम था तभीतभि से वह महनदि कुनद अनेक पहाडियों से घीरा है। परशुराम ने उन्मे से एक पहाड़ी को तोड कर लोगो के लिये उस पवित्र पानी को निकाला। इस कारण परशुराम का फरसा परशुराम केउनके हाथ से निकल गया। इस कारण परशुराम कोउन्हें लगा कि वह पाप से मुक्त है।
 
== नदी की लम्बाई (किलोमीटर मे) ==
== नदी की गहराई (मीटर और फुट) ==
 
ब्रह्मपुत्र नदी एक बहुत लम्बी नदी है है ब्रह्मपुत्रऔर सबसे बड़ी गहराई है, यह औसत गहराई 832 फीट (252 मीटर) गहरा है ब्रह्मपुत्रनदी की अधिकतम गहराई 1020 फीट (318 मीटर) है (252 मीटर) है। शेरपुर और जमालपुर में है, ब्रह्मपुत्र की अधिकतम गहराई 940 फुट (283 मीटर) तक पहुँचने में। ब्रह्मपुत्र यह 85 फीट की खाड़ी में (26 मीटर) बहती है। ब्रह्मपुत्र तिब्बत में है, यह अधिकतम गहराई 1068 फीट (321 मीटर) है।
 
== अपवाह तन्त्र ==