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nabi e karim [स्वल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम] ka nam e mubarak likhte samay unpe 'DARUD' padhana chahiye
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एक '''हदीस''' ({{lang-ar|'''حديث'''}} ''हदीस'' या {{transl|ar|DIN|हदीथ}}<ref>{{dictionary.com|Hadith|accessdate=2011-08-13}}</ref>, बहुवचन: {{lang|ar|أحاديث}} '''अहादीस''' {{sfn|Brown, Jonathan A.C. (2009)|p=3}}), [[मुहम्मद|पैग़म्बर मुहम्मद [स्वल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम]]] के कथनों, कार्यों या आदतों का वर्णन करने वाले विवरण या रिपोर्ट को कहते हैं। {{sfn|Brown, Jonathan A.C. (2009)|p=3}} यह शब्द अरबी भाषा से आता है और इसके अर्थ "रिपोर्ट (विवरण)", "लेखा" या "रिवायत" हैं। क़ुरआन से अलग, एक समान साहित्यिक काम जो सभी मुस्लिमों द्वारा मान्यता प्राप्त है। हदीस इकलौता संग्रह नहीं हैं।<br>
 
अहादीस अलग-अलग हदीसों के संग्रह को दर्शाता है, और इस्लाम की विभिन्न शाखाएं (सुन्नी, शिया) हदीसों के विभिन्न संग्रहों से परामर्श (हवाला) लेती हैं जबकि क़ुरआनीयत का एक अपेक्षाकृत छोटा पक्ष किसी भी हदीस संग्रह के प्रमाण को पूरी तरह से अस्वीकार करता हैं।<ref name="Aisha Y. Musa 2013">Aisha Y. Musa, The Qur’anists, Florida International University, accessed May 22, 2013.</ref><ref name="Neal Robinson 2013 pp. 85-89">Neal Robinson (2013), Islam: A Concise Introduction, Routledge, {{ISBN|978-0878402243}}, Chapter 7, pp. 85-89</ref>
 
== परिचय ==
[[इस्लाम|इस्लाम धर्म]] और दुनिया के सभी [[मुसलमान|मुसलमानो]] के लिए पवित्र [[क़ुरआन]] के बाद सबसे ज़्यादा महत्व अगर किसी किताब का है तो हदीसों का हैं, कुछ के लिए ये क़ुरआन जितनी ही महत्व रखती हैं जो ये मानते हैं कि [[मुहम्मद|पैगम्बर मुहम्मद [स्वल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम]]] का हर कथन हर बात उनकी एक ईश्वरीय सन्देश हैं जिसके बिना क़ुरआन समझना संभव नहीं यानि उनकी बातें क़ुरआन की व्यहवारिक विस्तार में समझ है।
 
इस्लाम और एक उसकी के मूल ग्रंथ क़ुरआन में अधिकतर विषयों पर जो आदेश-निर्देश, सिद्धांत, नियम, क़ानून, शिक्षाएँ, पिछली क़ौमों के वृत्तांत, रसूलों के आह्नान और सृष्टि व समाज से संबंधित बातों तथा एकेश्वरत्व के तर्क, अनेकेश्वरत्व के खंडन और परलोक-जीवन आदि की चर्चा हुई है, वह संक्षेप में है। इन सब की विस्तृत व्याख्या का दायित्व इस्लाम के अनुसार ईश्वर ने पैग़म्बर पर रखा।{{इस्लाम}}
 
== हदीसों का प्रसार ==
[[मुहम्मद|हज़रत पैगम्बर मुहम्मद [स्वल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम]] के समय उनके साथ रहने वाले [[सहाबा|उनके साथी]] उनकी बातें उनके तरीके लिख लिया या याद कर लिया करते थे इसी को हदीस कहा गया , बाद में हदीस और [[फ़िक़्ह्|फ़िक़ह]] के जानकार इमामों ने इन हदीसो को संग्रह कर के एक जगह ला दिया।
 
[[इस्लाम]] का [[मुहम्मद|हज़रत मुहम्मद]] [[मुहम्मद|[स्वल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम]]<nowiki>] के रसूल बनने के साथ उसके विशुद्ध रूप में जब पुनः आगमन हुआ, उससे पहले के धर्म-ग्रथों में जो विकार आ गया था, उसके कई कारणों में से एक यह भी था कि ईश-वाणी, रसूल के कथन और दूसरे इन्सानों व धर्माचार्यों, उपदेशकों, वाचकों, सुधारकों और धर्मविदों आदि के कथन भी आपस में मिल-जुल गए। ईशवाणी और मनुष्य-वाणी के मिश्रण में, मूल ईश-ग्रंथ कितना है और इसके अंश कौन-कौन से हैं, यह पता लगाना असंभव हो गया था। </nowiki>[[सहाबा|पैग़म्बर]] के[[मुहम्मद|[स्वल्लल्लाहु साथीअलैहि वस्सल्लम]]<nowiki>] के साथी हज़रत अबू सलमा की बयान की गई एक हदीस के मुताबिक़ आप ने हदीस-वर्णनकर्ताओं को सख़्त चेतावनी दी थी कि</nowiki>
 
{{Quote|‘‘जो व्यक्ति मुझ से संबंध लगाकर वह बात कहे जो मैंने नहीं कही, वह अपना ठिकाना जहन्नम (नर्क) में बना ले।’’|हज़रत मुहम्मद[स्वल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम] |हज़रत अबू सलमा की बयान की गई एक हदीस}}
 
== हदीस-संग्रह ==
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