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करियर की जानकारी
(श्री ज्ञानेश्वर मुळे का हिंदी पृष्ठ बनाया है)
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(करियर की जानकारी)
'''परिचय'''
 
भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ राजदूत श्री ज्ञानेश्वर मुळे मराठी के सशक्त लेखक और स्तंभ लेखक भी है। महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के श्री ज्ञानेश्वर मुळे भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ राजदूत के साथ-साथ एक प्रसिद्ध लेखक और स्तंभकार भी हैं। वे वर्तमान में सचिव एमईए (विदेश मंत्रालय और विदेशी भारतीय मामलों के मंत्रालय) के रूप में पद धारण करते हैं। 1 9 83 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हो गए और तब से भारत के वाणिज्य दूतावास, न्यूयॉर्क और भारत के उच्चायुक्त, माले , मालदीव समेत कई जिम्मेदार पदों पर कार्य किया है। वे एक सफल लेखक हैं और 15 से अधिक किताबें लिखी हैं, जिनका अनुवाद अरबी, उर्दू, कन्नड़ और हिंदी में किया गया है। मराठी में लिखी गई उनकी महान कृति - "माती, पंख आणि आकाश" को बेहद लोकप्रियता मिली है और उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, जलगांव (महाराष्ट्र) में कला पाठ्यक्रम में भी निर्धारित किया गया है। उन्होंने अपने मूल गांव में बालोद्यान अनाथालय और पुणे में ज्ञानेश्वर मुळे शिक्षा सोसाइटी सहित कई सामाजिक-शैक्षिक परियोजनाओं को प्रेरित किया है जो वैश्विक शिक्षा जैसे अभिनव अवधारणाओं को पेश करना चाहते हैं।
 
 
उन्हें शाहुजी छत्रपति कॉलेज कोल्हापुर से बीए (अंग्रेजी साहित्य) की डिग्री मिली और व  विश्वविद्यालय में प्रथम क्रमांक प्राप्त किया जिसके लिए उन्हें प्रतिष्ठित धनंजय कीर पुरस्कार भी मिला। सिविल सेवाओं में शामिल होने की मांग करते हुए, और यह महसूस करते हुए कि कोल्हापुर में अध्ययन संसाधनों और मार्गदर्शन की कमी थी, वे मुंबई चले गए। मुंबई में वे  प्रशासनिक करियर के लिए राज्य संस्थान में शामिल हो गए, जिससे उन्हें अपने अध्ययन के लिए बुनियादी सुविधाएँ प्राप्त हुई।
इस बीच, उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय में कार्मिक प्रबंधन का अध्ययन किया, और विश्वविद्यालय में  प्रथम क्रमांक हासिल करके के पीटर अल्वारेज़ पदक जीता. वे 1982 में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) परीक्षा में अव्वल रहे । बाद में संघ लोक सेवा में सफल रहे यूपीएससी  परीक्षा देकर वे भारतीय विदेश सेवा में नियुक्त हुए। जनवरी 2017 में, मुंबई के डी वाई पाटिल विश्वविद्यालय ने उन्हें 'समाज में अनुकरणीय योगदान' के लिए डॉक्टर ऑफ लिटरेचर उपाधि से   सम्मानित किया गया।
 
जनवरी 2017 में, मुंबई के डी वाई पाटिल विश्वविद्यालय ने उन्हें 'समाज में अनुकरणीय योगदान' के लिए डॉक्टर ऑफ लिटरेचर उपाधि से   सम्मानित किया गया।
'''प्रारंभिक करियर'''
 
वे  पुणे के उप कलेक्टर के रूप में कार्यालय में शामिल हो गए और बाद में 1983  में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हो गए। उन्होंने पहली बार टोक्यो में तीसरे सचिव के रूप में और बाद में जापान के भारतीय दूतावास के दूसरे सचिव के रूप में कार्य किया। जापान में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने  महत्वाकांक्षी सांस्कृतिक उत्थान, भारत का त्यौहार सफलतापूर्वक प्रबंधित किया, जिसे 1988  में जापान के 20 से अधिक शहरों में आयोजित किया गया था। उन्होंने मॉस्को, रूस में इंडियन बिजनेस एसोसिएशन की स्थापना की थी और दो साल के लिए इसके संस्थापक अध्यक्ष रहे। जापान में दूसरे सचिव के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने आर्थिक संबंधों की देखभाल की और टोयोटा मोटर्स, एनटीटी-इतोचु, होंडा मोटर्स और वाईकेके सहित भारत में कई जापानी निवेशों का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने रूस, मॉरीशस में और फिर सीरिया में भारतीय दूतावास के मंत्री के रूप में विभिन्न क्षमताओं में कार्य किया है। वे  भारत और रूस के बीच विशेष रूप से राज्य नियंत्रित (रुपये - रूबल) व्यापार से सीधे व्यापार व्यवस्था  में परिवर्तन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। सीरिया में  उनको साहित्य अकादमी ने पहली बार  एमओयू की सुविधा प्रदान की और उन्हें अरब राइटर्स एसोसिएशन ने सम्मानित किया है। मॉरीशस में उन्होंने भारतीय सहायता के साथ साइबर टॉवर परियोजना और राजीव गांधी विज्ञान केंद्र को सुव्यवस्थित करके इस परियोजना में  गति प्रदान की।
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