"ओदिसी" के अवतरणों में अंतर

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इतना होते हुए भी ओडेसी बहुत-सी बातों में इलियड के समानान्तर है। इलियड और ओडेसी दोनों काव्यों का आरम्भ कथाकाल की अन्तिम छोर पकड़कर होता है। दोनों का अन्त भी प्रारम्भ में घोषित विषय पर होता है। दोनों की गति-रेखा वृत्ताकार है। दोनों में सर्गों की संख्या 24 है। इलियड के अन्त में हेक्टर का निधन है तो ओडेसी में पाणि-प्रार्थी राजकुमारों का। इलियड के अन्त में एक शान्त वातावरण, कुछ काल के ही लिए सही, उपस्थित हो जाता है जिसमें दोनों पक्ष मृतकों का दाह-संस्कार करते हैं। ओडेसी में तो अन्त में प्रियामिलन एवं स्थायी शान्ति आ जाती है। दोनों महाकाव्यों के अन्दर आये चरित्र एक ही पैमाने और साँचे में ढले ज्ञात होते हैं। एन्थनी जिस कुटिलता और तत्परता से ग्रीक योद्धाओं की सहायता इलियड में करती है उसी रूप में ओडेसी में भी। पोजीडॉन (वरुण) दोनों में एक क्रूर एवं उजड्ड देवता की तरह है। ओडेसियस दोनों महाकाव्यों में साहसी, वीर, क्रूरकर्मा एवं कुटिल रूप में चित्रित है। मिनीलास उसी प्रकार धनी, उदार हृदय योद्धा दोनों महाकाव्यों में है। बुद्धिमान् वृद्ध नेस्टर का मित्र भी वहीं रहता है। यदि इन महाकाव्यों के रचयिता अलग-अलग होते तो चरित्रों के चित्रण में फर्क अवश्य आ जाता। उदाहरण के लिए होमर का ‘डायोमीडिल’ या ‘अफ्रोदीती’ वर्जिल के डायोमीडिज या अफ्रोदीती (वीनस) से बिलकुल अलग हैं। कथानक एवं चरित्रों का समान पैटर्न बताता है कि दोनों काव्य एक ही व्यक्ति की प्रतिभा से निःसृत हैं।
 
== इन्हें भी देखें==
== सन्दर्भ ==
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== इन्हें भी देखें==
*[[प्रसिद्ध पुस्तकें]]
 
== सन्दर्भ ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==