"मोना लीज़ा" के अवतरणों में अंतर

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फ्लोरेन्स जहाँ पर सन् 1503 में पेंटिंग बननी शुरू हुई वहाँ से प्राप्‍त दस्तावेजों के आधार पर उनका कथन है कि इसी वर्ष के अन्त में मोनालीसा ने एक शिशु को जन्म दिया था। एक इतालवी व अमेरिकी शोधकर्ता द्वारा फ्लोरेन्स से प्राप्‍त चर्च के पादरी द्वारा शिशु के नामकरण की धार्मिक रस्म के दस्तावेजों के हवाले से इस बात की पुष्‍टि की गई है। न्यूलैंड का विश्‍वास है कि मोनालिसा ने अपने पेट में पल रहे बच्चे की स्मृति व अनुसंशा से अपना चित्र बनवाया था।<ref>{{cite book|author=फरागो, क्लेयर जे.|year=1999|title=Leonardo's projects, c. 1500–1519|publisher=टेलर & फ़्रांसिस|ISBN 978-0-8153-2935-0|accessdate=29 October 2015}}</ref> उनका कथन है कि संसार में आने वाले नये जीवन का रोमांच व मातृत्व को पुलकित कर देने वाली प्रसन्नता के कारण ही उसके चेहरे पर यह अलैकिक व अद्भुत मुस्कान है। एक अन्य खोज में फ्लोरेंस निवासी जियूसेवे पल्लाती नामक एक अध्यापक ने 25 वर्षों तक शहर के तमाम प्राचीन दस्तावेजों व अभिलेखों की खाख छानने के बाद रहस्योद्धाटन किया, सन् 1495 में एक धनी रेशम व्यापारी सर फ्रांसिस्को डेल जकाडें के साथ लिसा घेरारदिनी का विवाह हुआ था।
 
सन् 1550 में पुर्नजागरण कालीन कलाकारों के इटली निवासी प्रसिद्ध जीवनी लेखक जार्जियो वसारी द्वारा रेशम व्यापारी की g c x v f fxfz v पत्नी [[लीज़ा घेरार्दिनी]] की तस्वीर को '''मोना लीज़ा''' नाम दिया गया। इतालवी में ''मोना'' शब्द ''मैडम'' के लिये प्रयुक्त होता है। हलाँकि इसके सदियों बाद तक भी इस कलाकृति में चित्रित इस महिला को उसके अन्य प्रचलित नाम लाजिओकान्डे से भी जाना जाता रहा है। उस समय की अधिकतर कला-कृतियों की भांति इस चित्र में भी कलाकार के हस्ताक्षर, तिथि व पोज देने वाली महिला का नाम मुद्रित नहीं है।
 
पल्लानती के अनुसार लियनार्डो के पिता सर पियरे व फ्रांसिसको के घर परस्पर अधिक दूरी पर नहीं थे, पर दोनों ही परिवारों के बीच परस्पर घनिष्ठ संबंध थे। उस समय लीज़ा की आयु 24 वर्ष थी।