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इस्लाम धर्म की जानकारियां मो आसिफ नवाब बिहारशरीफ।
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वो ईश्वर को [[अल्लाह]] कहते हैं। [[इस्लाम धर्म]] की धार्मिक पुस्तक [[कुरान]] है और प्रत्येक मुसलमान ईश्वर शक्ति में विश्ववास रखता है।
 
इस्लाम का मूल मंत्र "लॉ इलाह इल्ल , अल्लाह , मुहम्मद उर रसूल अल्लाह" है,अर्थात अल्लाह एकके है।सिवा कोई माबूद नही है और मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उनके आखरी रसूल (पैगम्बर)हैं।
 
इस्लाम वाहिद एक ऐसा धर्म(मज़हब) है जो सत्यता पर आधारित है।इस्लाम धर्म मे बाकी धर्मो से ज़्यादा पाकीज़गी बताई गई है।पवित्र कुरआन के अनुसार एक ईश्वर है और उस एक ईश्वर का नाम सिर्फ अल्लाह है।
=== हिन्दूधर्म ===
 
इसलिए अगर कोई पूछे कि ईश्वर एक है और वह कौन है तो क़ुरान के हिसाब से एक ही सटीक जवाब मिलता है कि ईश्वर सिर्फ और सिर्फ अल्लाह है जिसके 99 नाम हैं।
 
इस्लाम मे मुसलमानो को खड़े खुले में पेशाब(इस्तीनज़ा) करने की इजाज़त नही क्योंकि इससे इंसान नापाक होता है और नमाज़ पढ़ने के लायक नही रहता इसलिए इस्लाम मे बैठके पेशाब करने को कहा गया है और उसके बाद पानी से श्रम गाह को धोने की इजाज़त दी गयी है।
 
इस्लाम मे 5 वक़्त की नामाज़ मुक़र्रर की गई है और हर नम्र फ़र्ज़ है।इस्लाम मे रमज़ान एक पाक महीना है जो कि 30 दिनों का होता है और 30 दिनों तक रोज़ रखना जायज़ हैजिसकी उम्र 12 या 12 से ज़्यादा हो।12 से कम उम्र पे रोज़ फ़र्ज़ नही।सेहत खराब की हालत में भी रोज़ फ़र्ज़ नही लेकिन रोज़े के बदले ज़कात देना फ़र्ज़ है।वैसा शख्स जो रोज़ा न रख सके किसी भी वजह से तो उसको उसके बदले ग़रीबो को खाना खिलाने और उसे पैसे देने या उस गरीब की जायज़ ख्वाइश पूरा करना लाज़मी है।
 
=== हिन्दू धर्म ===
[[वेद]] के अनुसार व्यक्ति के भीतर पुरुष ईश्वर ही है। परमेश्वर एक ही है। वैदिक और पाश्चात्य मतों में परमेश्वर की अवधारणा में यह गहरा अन्तर है कि वेद के अनुसार ईश्वर भीतर और परे दोनों है जबकि पाश्चात्य धर्मों के अनुसार ईश्वर केवल परे है। ईश्वर परब्रह्म का सगुण रूप है।
 
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