"ईश्वर" के अवतरणों में अंतर

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इस्लाम धर्म by आसिफ नवाब बिहारशरीफ
छो (इस्लाम धर्म की जानकारियां मो आसिफ नवाब बिहारशरीफ।)
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(इस्लाम धर्म by आसिफ नवाब बिहारशरीफ)
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इसलिए अगर कोई पूछे कि ईश्वर एक है और वह कौन है तो क़ुरान के हिसाब से एक ही सटीक जवाब मिलता है कि ईश्वर सिर्फ और सिर्फ अल्लाह है जिसके 99 नाम हैं।
 
इस्लाम मे मुसलमानो को खड़े खुले में पेशाब(इस्तीनज़ा) करने की इजाज़त नही क्योंकि इससे इंसान नापाक होता है और नमाज़ पढ़ने के लायक नही रहता इसलिए इस्लाम मे बैठके पेशाब करने को कहा गया है और उसके बाद पानी से श्रम गाहशर्मगाह को धोने की इजाज़त दी गयी है।
 
इस्लाम मे 5 वक़्त की नामाज़ मुक़र्रर की गई है और हर नम्र फ़र्ज़ है।इस्लाम मे रमज़ान एक पाक महीना है जो कि 30 दिनों का होता है और 30 दिनों तक रोज़ रखना जायज़ हैजिसकी उम्र 12 या 12 से ज़्यादा हो।12 से कम उम्र पे रोज़ फ़र्ज़ नही।सेहत खराब की हालत में भी रोज़ फ़र्ज़ नही लेकिन रोज़े के बदले ज़कात देना फ़र्ज़ है।वैसा शख्स जो रोज़ा न रख सके किसी भी वजह से तो उसको उसके बदले ग़रीबो को खाना खिलाने और उसे पैसे देने या उस गरीब की जायज़ ख्वाइश पूरा करना लाज़मी है।
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