"सूक्त" के अवतरणों में अंतर

आकार में कोई परिवर्तन नहीं ,  3 वर्ष पहले
छो (बॉट: आंशिक वर्तनी सुधार।)
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल एप सम्पादन
 
==अग्नि सूक्त==
ऋषि - मधुच्छन्दा, निवास स्थान - पृथ्वीस्थानीय, सूक्त संख्या - 2001.1
 
ऋग्वेदीय देवों में अग्नि का सबसे प्रमुख स्थान हैं वैदिक आर्यों के लिए देवताओं में इन्द्र के पश्चात अग्नि देव का ही पूजनीय स्थान है। वैदिक मंत्रों के अनुसार अग्निदेव -नेतृत्व शक्ति से सम्पन्न, यज्ञ की आहुतियों को ग्रहण करने वाला तथा तेज एवं प्रकाश का अधिष्ठाता है। अग्नि को द्यावाप्रथ्वी का पुत्र बताया गया है। मातरिश्वा भृगु तथा अंगिरा इसे भूतल पर लाऐ। अग्नि पार्थिव देव है। यज्ञाग्नि के रूप में इसका मूर्तिकरण प्राप्त होता है। अतः इसे ऋत्विक होता और पुरोहित बताया गया है। यह यजमानों के द्वारा विभिन्न देवों के उद्देश्य से अपने में प्रक्षिप्त हविष् को उनके पास पहुँचाता है।
बेनामी उपयोगकर्ता