"आचार्य महाप्रज्ञ" के अवतरणों में अंतर

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उन्होंने दस वर्ष की आयु में जैन संन्यासी के रूप में विकास और धार्मिक प्रतिबिंब का जीवन आरम्भ किया।<ref>{{cite web|url=http://www.terapanthinfo.com/AcharyaMahapragya/AGreatSaint/tabid/215/language/en-US/Default.aspx|title=TRANSFORMATION FROM NATHMAL TO ACHARYA MAHAPRAGYA|publisher=Terapanth Secretariat|accessdate=2010-07-10}}</ref> महाप्रज्ञ ने अनुव्रत आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाई जो [[गुरु]] [[आचार्य तुलसी]] ने 1949 में आरम्भ किया था और 1995 के आंदोलन में स्वीकृत अधिनायक बन गए।<ref>{{cite web|url= http://www.terapanthinfo.com/AcharyaMahapragya/AGreatSaint/tabid/215/language/en-US/Default.aspx|title=Anuvrat Global Prospective|publisher=Terapanth Secretariat|accessdate=2010-07-10}}</ref> आचार्य महाप्रज्ञ ने 1970 के दशक में अच्छी तरह से नियमबद्ध प्रेक्षा ध्यान तैयार किया<ref name="Jain Vishva Bharati">{{cite book|first=Acharya Mahapragya|title=Praksha Dhyaan: Theory and Practice|publisher=Jain Vishva Bharati|chapter=Publisher note by Shankar Mehta}}</ref> और शिक्षा प्रणाली में "जीवन विज्ञान" का विकास किया जो छात्रों के संतुलित विकास और उसका चरित्र निर्माण के लिए प्रयोगिक पहुँच है।<ref>{{cite web|url=http://www.terapanthinfo.com/AcharyaMahapragya/AGreatSaint/tabid/215/language/en-US/Default.aspx|title=Jeevan Vigyan|publisher=Terapanth Secretariat|accessdate=2010-07-10}}</ref>
 
== जीवन ==
आचार्य महाप्रज्ञ का जन्म हिन्दू तिथि के अनुसार विक्रम संवत 1977, आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी को [[राजस्थान]] के टमकोर नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम तोलाराम तथा माता का नाम बालू था। आचार्य महाप्रज्ञ का बचपन का नाम नथमल था। उनके बचपन में पिता का देहांत हो गया था। माँ बालू ने उनका पालन-पोषण किया। उनकी माँ धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थी। इस कारण उन्हें बचपन से ही धार्मिक संस्कार मिले थे।
 
विक्रम संवत 1987, माघ शुक्ल की दशमी (29 जनवरी 1939) को उन्होंने दस वर्ष की आयु में अपनी माता के साथ तेरापंथ के [[आचार्य कालूगणी]] से दीक्षा ग्रहण की।
 
आचार्य कालूगणी की आज्ञा से मुनि तुलसी जो आगे चल कर तेरापंथ के आचार्य बने, के मार्गदर्शन में दर्शन, न्याय, व्याकरण, मनोविज्ञान, ज्योतिष, आयुर्वेद आदि का तथा जैन आगम, बौद्ध ग्रंथों, वैदिक ग्रंथों तथा प्राचीन शास्त्रों का गहन अध्ययन किया था। वे संस्कृत भाषा के आशु कवि थे।
 
 
== इन्हें भी देखें==
* [[साध्वी कनकप्रभा]]
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