"भारत छोड़ो आन्दोलन और बिहार" के अवतरणों में अंतर

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(Bihar modern history:Dr. Anugrah Narayan Singh was chosen to lead Anti Simon commission protest in Bihar)
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१९२७ ई. में ब्रिटिश संसद एवं भारतीय वायसराय लॉर्ड डरविन ने एक घोषणा की भारत में फैल रही नैराश्य स्थिति की समाप्ति हेतु १९२८ ई. में एक कमीशन की स्थापना की घोषणा की। इस कमीशन के अध्यक्ष सर जॉन साइमन थे, अतः इसे साइमन कमीशन कहा जाता है किन्तु इसमें कोई भी भारतीय सदस्य नहीं रखा गया था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस आयोग के बहिष्कार एवं विरोध का फैसला किया। बिहार प्रदेश कांग्रेस कार्यसमिति की पटना में सर अली इमाम की अध्यक्षता में एक बैठक हुई जिसमें साइमन कमीशन के पटना आगमन पर पूर्ण बहिष्कार किया गया।
 
१८ दिसम्बर १९२८ को साइमन कमीशन बिहार आया। हार्डिंग पार्क (पटना) के सामने बने विशेष प्लेटफार्म के सामने ३०,००० राष्ट्रवादियों ने साइमन वापस जाओ के नारे से स्वागत किया गया। साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लखनऊ में पण्डित जवाहर लाल एवं लाहौर में लाला लाजपत राय पर लाठियाँ बरसाई गईं। लाठी की चोट से लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई। फलतः विद्रोह पूरे देश में फैल गया। कमीशन के विरोध में बिहार में अनुग्रहराजेन्द्र नारायण सिंहप्रसाद ने इसकी अध्यक्षता की थी। बिहार राष्ट्रवादियों ने नारा दिया कि “जवानों सवेरा हुआ साइमन भगाने का बेरा हुआ"। विरोधी नेताओं में ब्रज किशोर जी, रामदयालु जी एवं अनुग्रह नारायण बाबू थे। इस घटना ने बिहार के लिए नई चेतना पैदा कर दी। १९२९ ई. में सर्वदलीय सम्मेलन हुआ जिसमें भारत के लिए संविधान बनाने के लिए मोती लाल नेहरू की अध्यक्षता में एक समिति बनी जिसे नेहरू रिपोर्ट कहते हैं। पटना में दानापुर रोड बना राष्ट्रीय पाठशाला (अन्य) भी खुली। एक मियाँ खैरूद्दीन के मकान के छात्रों को पढ़ाना शुरू किया गया। बाद में यही जगह सदाकत आश्रम के रूप में बदल गया।
 
नवम्बर १९२१ ई. ब्रिटिश युवराज का भारत आगमन हुआ। इनके आगमन के विरोध करने का फैसला किया गया। इसके लिए बिहार प्रान्तीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। जब राजकुमार २२ दिसम्बर १९२१ को पटना आये तो पूरे शहर में हड़ताल थी। ५ जनवरी १९२२ को उत्तर प्रदेश के चौरा-चौरी नामक स्थान पर उग्र भीड़ ने २१ सिपाहियों को जिन्दा जला दिया तो गाँधी जी ने असहयोग आन्दोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया। गाँधी जी को १० मार्च १९२२ को गिरफ्तार कर ६ महीना के लिए जेल भेज दिया गया।