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==धर्म==
{{मुख्य|धर्म}}
 
प्राचीन काल में ही भारतीय मनीषियों ने [[धर्म]] को वैज्ञानिक ढंग से समझने का प्रयत्न किया था। धर्म का विवेचन करते समय समझाया गया है कि धर्म वह है जिससे अभ्युदय और निःश्रेयस की सिद्धि हो-
: ''यतो अभ्युदयनिःश्रेयससिद्धिः स धर्मः। (कणाद, वैशेषिकसूत्र, १.१.२)
 
==अर्थ==
{{मुख्य|अर्थ}}
 
: ''मनुष्याणां वृत्ति:अर्थः मनुष्यवती भूमिरित्यर्थः (अर्थशास्त्र)
: अर्थात जो भी विचार और क्रियाएं भौतिक जीवन से संबंधित है उन्हें अर्थ की संज्ञा से संबोधित किया जाता है।
 
==काम==
{{मुख्य|काम}}
महर्षि वात्स्यायन के अनुसार,
 
महर्षि [[वात्स्यायन]] के अनुसार,
: ''श्रोत्रत्ववच्क्षुर्जिह्वा ध्राणानामात्म संयुक्ते नमन साधिष्ठितानां स्वेषु स्वेषु विषयेष्जानुकूल्यतः प्रवृतिः कामः।
: ''स्पर्शविशेषविषयात्तवस्यामिमानिकसुखानुविद्धा। फलवत्यर्थप्रलीतिःप्राधान्यात्कामःतंकामसूत्रान्नगरिकजनसमवियच्च प्रतिपद्येत।
 
==मोक्ष==
{{मुख्य|मोक्ष}}
 
== सन्दर्भ ==
* [https://books.google.co.in/books?id=Srw6DwAAQBAJ&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय संस्कृति का मूल आधार - पुरुषार्थ चतुष्ठय] (गूगल पुस्तक ; लेखक - आशीष कुमार)
* [http://www.hindigaurav.com/index.php?option=com_content&view=article&id=646:2011-04-14-12-27-28&catid=17:2011-02-27-10-33-29&Itemid=19 चार पुरुषार्थ को जानें] (हिन्दी गौरव)
*[http://shodhganga.inflibnet.ac.in/bitstream/10603/180269/5/05_chapter%202.pdf पुरुषार्थ चतुष्टय]
 
 
 
[[श्रेणी:हिन्दू धर्म]]