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== विकास और नामकरण ==
[[चित्र:Calcuttaesplanade 1850.jpg|left|thumb|१९वीं सदी में कोलकाता]]
आधिकारिक रूप से इस शहर का नाम कोलकाता [[१ जनवरी]], [[२००१]] को रखा गया। इसका पूर्व नाम [[अंग्रेजी]] में "कैलकटा' था लेकिन बांग्ला भाषी इसे सदा कोलकाता या कोलिकाता के नाम से ही जानते है एवं [[हिन्दी]] भाषी समुदाय में यह कलकत्ता के नाम से जाना जाता रहा है। सम्राट [[अकबर]] के चुंगी दस्तावेजों और पंद्रहवी सदी के [[विप्रदास]] की कविताओं में इस नाम का बार-बार उल्लेख मिलता है। इसके नाम की उत्पत्ति के बारे में कई तरह की कहानियाँ मशहूर हैं। सबसे लोकप्रिय कहानी के अनुसार हिंदुओं की देवी [[काली]] के नाम से इस शहर के नाम की उत्पत्ति हुई है। इस शहर के अस्तित्व का उल्लेख व्यापारिक बंदरगाह के रूप में [[चीन]] के प्राचीन यात्रियों के यात्रा वृत्तांत और [[फारसी]] व्यापारियों के दस्तावेजों में मिलता है। [[महाभारत]] में भी बंगाल के कुछ राजाओं का नाम है जो [[कौरव]] सेना की तरफ से युद्ध में शामिल हुए थे। नाम की कहानी और विवाद चाहे जो भी हों इतना तो तय है कि यह आधुनिक [[भारत के शहर|भारत के शहरों]] में सबसे पहले बसने वाले शहरों में से एक है। [[१६९०]] में [[इस्ट इंडिया कंपनी]] के अधिकारी "जाब चारनाक" ने अपने कंपनी के व्यापारियों के लिये एक बस्ती बसाई थी। [[१६९८]] में इस्ट इंडिया कंपनी ने एक स्थानीय [[जमींदार]] परिवार [[सावर्ण रायचौधुरी]](সাবর্ণ রায়চৌধুরী) से तीन गाँव {(सूतानुटि(সূতানুটি), कोलिकाता(কলিকাতা) और गोबिंदपुर(গোবিন্দপুর)} के इजारा लिये। अगले साल कंपनी ने इन तीन गाँवों का विकास प्रेसिडेंसी सिटी के रूप में करना शुरू किया। [[१७२७]] में [[इंग्लैंड]] के राजा [[जार्ज द्वतीय]] के आदेशानुसार यहाँ एक नागरिक न्यायालय की स्थापना की गयी। [[कोलकाता नगर निगम]] की स्थापना की गयी और पहले [[मेयर]] का चुनाव हुआ। [[१७५६]] में बंगाल के नवाब [[सिराजुद्दौला]] ने कोलिकाता पर आक्रमण कर उसे जीत लिया। उसने इसका नाम "अलीनगर"(আলিনগর) रखा। लेकिन साल भर के अंदर ही सिराजुद्दौला की पकड़ यहाँ ढीली पड़ गयी और अंग्रेजों का इस पर पुन: अधिकार हो गया। [[१७७२]] में [[वारेन हेस्टिंग्स]] ने इसे ब्रिटिश शासकों की भारतीय [[राजधानी]] बना दी। कुछ इतिहासकार इस शहर की एक बड़े शहर के रूप में स्थापना की शुरुआत [[१६९८]] में [[फोर्ट विलियम]] की स्थापना से जोड़ कर देखते हैं। [[१९१२]] तक कोलकाता भारत में अंग्रेजो की राजधानी बनी रही।
 
[[१७५७]] के बाद से इस शहर पर पूरी तरह अंग्रेजों का प्रभुत्व स्थापित हो गया और [[१८५०]] के बाद से इस शहर का तेजी से औद्योगिक विकास होना शुरु हुआ खासकर कपड़ों के उद्योग का विकास नाटकीय रूप से यहाँ बढा हलाकि इस विकास का असर शहर को छोड़कर आसपास के इलाकों में कहीं परिलक्षित नहीं हुआ। [[५ अक्टूबर]] [[१८६५]] को समुद्री तूफान (जिसमे साठ हजार से ज्यादा लोग मारे गये) की वजह से कोलकाता में बुरी तरह तबाही होने के बावजूद कोलकात अधिकांशत: अनियोजित रूप से अगले डेढ सौ सालों में बढता रहा और आज इसकी आबादी लगभ १ करोड़ ४० लाख है। कोलकाता [[१९८०]] से पहले भारत की सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर था, लेकिन इसके बाद [[मुंबई]] ने इसकी जगह ली। भारत की आज़ादी के समय [[१९४७]] में और [[१९७१]] के भारत [[पाकिस्तान]] युद्ध के बाद "पूर्वी बंगाल" (अब [[बांग्लादेश]]) से यहाँ शरणार्थियों की बाढ आ गयी जिसने इस शहर की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह झकझोरा।
=== स्वाधीनता आंदोलन में भूमिका ===
 
ऐतिहासिक रूप से कोलकाता [[भारतीय स्वाधीनता आंदोलन]] के हर चरण में केन्द्रीय भूमिका में रहा है। [[भारतीया राष्ट्रीय कांग्रेस]] के साथ साथ कई राजनैतिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों जैसे "हिन्दू मेला" और क्रांतिकारी संगठन "युगांतर", "अनुशीलन" इत्यादी की स्थापना का गौरव इस शहर को हासिल है। प्रांभिक राष्ट्रवादी व्यक्तित्वों में [[अरविंद घोष]](অরবিন্দ ঘোষ), इंदिरा देवी चौधरानी(ইন্দিরা দেবী চৌধুরানী), [[विपिनचंद्र पाल]](বিপিনচন্দ্র পাল) का नाम प्रमुख है। आरंभिक राष्ट्रवादियों के प्रेरणा के केन्द्र बिन्दू बने [[रामकृष्ण परमहंस]](রামকৃষ্ণ পরমহংস) के [[शिष्य]] [[स्वामी]] [[विवेकानंद]](স্বামী বিবেকানন্দ)। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अध्यक्ष बने '''श्री व्योमेश चंद्र बैनर्जी'''(উমেশ চন্দ্র ব্যানার্জ্জী) और [[स्वराज]] की वकालत करने वाले पहले व्यक्ति श्री '''सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी'''(সুরেন্দ্রনাথ ব্যানাার্জ্জী) भी कोलकाता से ही थे। १९ वी सदी के उत्तरार्द्ध और २० वीं शताब्दी के प्रारंभ में [[बांग्ला]] साहित्यकार [[बंकिमचंद्र चटर्जी]](বঙ্কিমচন্দ্র চট্টোপাধ্যায়) ने बंगाली राष्ट्रवादियों के बहुत प्रभावित किया। इन्हीं का लिखा [[आनंदमठ]] में लिखा गीत [[वन्दे मातरम]]([[বন্দে মাতরম্]]) आज भारत का राष्ट्र गीत है। [[सुभाषचंद्र बोस]](নেতাজী সুভাষ চন্দ্র বোস) ने [[आजाद हिंद फौज]] का गठन कर अंग्रेजो को काफी साँसत में रखा। इसके अलावा [[रवींद्रनाथ टैगोर]](রবীন্দ্রনাথ ঠাকুর) से लेकर सैकड़ों स्वाधीनता के सिपाही विभिन्न रूपों में इस शहर में मौजूद रहे हैं।
 
=== बाबू संस्कृति और बंगाली पुनर्जागरण ===
|publisher=The Indian Museum of Kolkata | url=http://www.indianmuseumkolkata.org/history.html | title=History of Indian museum | accessdate=2006-04-23}}</ref> [[विक्टोरिया मेमोरियल]] कोलकाता का प्रमुख [[कोलकाता के दर्शनीय स्थल|दर्शनीय स्थल]] है। यहां के संग्रहालय में शहर का इतिहास अभिलेखित है। यहां का [[भारतीय राष्ट्रीय पुस्तकालय]] भारत का एक मुख्य और बड़ा पुस्तकालय है। [[फाइन आर्ट्स अकादमी, कोलकाता|फाइन आर्ट्स अकादमी]] और कई अन्य कला दीर्घाएं नियमित कला-प्रदर्शनियां आयोजित करती रहती हैं।
 
शहर में नाटकों आदि की परंपरा जात्रा, थियेटर और सामूहिक थियेटर के रूप में जीवित है। यहां [[हिन्दी चलचित्र]] भी उतना ही लोकप्रिय है, जितना कि [[बांग्ला चलचित्र, जिसे [[टॉलीवुड]] नाम दिया गया है। यहां का फिल्म उद्योग [[टॉलीगंज]] में स्थित है। यहां के लंबे फिल्म-निर्माण की देन है प्रसिद्ध [[फिल्म निर्देशक]] जैसे [[सत्यजीत राय]](সত্যজিৎ রায়), [[मृणाल सेन]](মৃৃণাল সেন), [[तपन सिन्हा]](তপন সিন্হা) और [[ऋत्विक घटक]](ঋত্ত্বিক ঘটক)। इनके समकालीन क्षेत्रीय निर्देशक हैं, [[अपर्णा सेन]](অপর্ণা সেন) और [[रितुपर्णो घोष]](ঋতুপর্ণ ঘোষ)
 
[[बंगाली खाना|कोलकाता के खानपान]] के मुख्य घटक हैं [[चावल]] और [[माछेर झोल]],<ref name=machhe>{{cite web
|work=Festivals of Bengal
|publisher=West Bengal Tourism, Government of West Bengal
}}</ref> यह त्यौहार प्रायः [[अक्टूबर]] के माह में आता है, पर हर चौथे वर्ष [[सितंबर]] में भी आ सकता है। अन्य उल्लेखनीय त्यौहारों में [[जगद्धात्री]] पूजा, [[पोइला बैसाख]](পয়লা বৈশাখ), [[सरस्वती पूजा]], [[रथ यात्रा]], [[पौष पॉर्बो]](পৌষ পার্ব্বণ), [[दीवाली]], [[होली]], [[क्रिस्मस]], [[ईद]], आदि आते हैं। सांस्कृतिक उत्सवों में [[कोलकाता पुस्तक मेला]], [[कोलकाता फिल्मोत्सव]], [[डोवर लेन संगीत उत्सव]] और [[नेशनल थियेटर फेस्टिवल]] आते हैं।
 
नगर में [[भारतीय शास्त्रीय संगीत]] और बंगाली लोक संगीत को भी सराहा जाता रहा है। [[१९वीं शताब्दी|उन्नीसवीं]] और [[बीसवीं शताब्दी]] से ही [[बंगाली साहित्य]] का आधुनिकिकरण हो चुका है। यह आधुनिक साहित्यकारों की रचनाओं में झलकता है, जैसे [[बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय]](বঙ্কিমচন্দ্র চট্টোপাধ্যায়), [[माइकल मधुसूदन दत्त]](মাইকেল মধুসূদন দত্ত), [[रविंद्रनाथ ठाकुर]](রবীন্দ্র নাথ ঠাকুর), [[काजी नज़रुल इस्लाम]](কাজী নজরুল ইসলাম) और [[शरतचंद्र चट्टोपाध्याय]](শরৎচন্দ্র চট্টোপাধ্যায়), आदि। इन साहित्यकारों द्वारा तय की गयी उच्च श्रेणी की साहित्य परंपरा को [[जीबनानंद दासजीबनानंददास]](জীবনানন্দ দাশ), [[बिभूतिभूषण बंधोपाध्याय]](বিভূতিভূষণ বন্দোপাধ্যায়), [[ताराशंकर बंधोपाध्याय]](তারাশঙ্কর বন্দোপাধ্যায়), [[माणिक बंदोपाध्याय]](মাণিক বন্দোপাধ্যায়), [[आशापूर्णा देवी]](আশাপূর্ণা দেবী), [[शिशिरेन्दु मुखोपाध्याय]](শিশিরেন্দু মুখোপাধ্যায়), [[बुद्धदेव गुहा]](বুদ্ধদেব গুহ), [[महाश्वेता देवी]](মহাশ্বেতা দেবী), [[समरेश मजूमदार]](সমরেশ মজুমদার), [[संजीव चट्टोपाध्याय]](সঞ্জীব চট্টোপাধ্যায়) और [[सुनील गंगोपाध्याय]](সুনীল গঙ্গোপাধ্যায়) ने आगे बढ़ाया है।
 
साठ के दशक में [[भुखी पीढी (हंगरी जेनरेशन)]] नामके एक साहित्यिक अंदोलनकारीयों का आगमन हुया जिसके सदस्यों ने पुरे कोलकाता शहर को अपने करतुतों और लेखन के जरिये हिला दिया था। उसके चर्चे विदेशों तक जा पंहुचा था। उस अंदोलन के सदस्यों में प्रधान थे [[मलय रायचौधुरी]](মলয় রায়চৌধুরী), [[सुबिमल बसाक]](সুবিমল বসাক)। [[देबी राय]](দেবী রায়), [[समीर रायचौधुरी]](সমীর রায়চৌধুরী), [[फालगुनि राय]](ফাল্গুনী রায়), [[अनिल करनजय]](অনীল করঞ্জাই), [[बासुदेब दाशगुप्ता]](বাসুদেব দাশগুপ্ত), [[त्रिदिब मित्रा]](ত্রিদিব মিত্র), [[शक्ति चट्टोपध्याय]](শক্তি চট্টোপাধ্যায়) प्रमुख हस्तियां।
 
[[१९९०]] के आरंभिक दशक से ही भारत में जैज़ और रॉक संगीत का उद्भव हुआ था। इस शाइली से जुड़े कई बांग्ला बैण्ड हैं, जिसे जीबोनमुखी गान कहा जाता है। इन बैंडों में चंद्रबिंदु, कैक्टस, इन्सोम्निया, फॉसिल्स और लक्खीचरा आदि कुछ हैं। इनसे जुड़े कलाकारों में कबीर सुमन(কবীর সুমন), नचिकेता(নচিকেতা), अंजना दत्त(অঞ্জন দত্ত), आदि हैं।
 
== स्मारक एवं दर्शनीय स्थल ==