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==जन्म व बचपन==
मीना कुमारी का असली नाम '''महजबीं बानो''' था और ये [[बंबई]] में पैदा हुई थीं। उनके पिता अली बक्श [[पारसी रंगमंच]] के एक मँझे हुए कलाकार थे और उन्होंने "ईद का चाँद" फिल्म में [[संगीतकार]] का भी काम किया था। उनकी माँ प्रभावती देवी (बाद में इकबाल बानो), भी एक मशहूर नृत्यांगना और अदाकारा थी। मीना कुमारी की बड़ी बहन शमा (खुर्शीद जुनियर) और छोटी बहन मधु (बेबी माधुरी) भी फिल्म अभिनेत्री थीं। कहा जाता है कि दरिद्रता से ग्रस्त उनके पिता अली बक़्श उन्हें पैदा होते ही अनाथाश्रम में छोड़ आए थे चूँकि वे उनके डाॅक्टर श्रीमान गड्रे को उनकी फ़ीस देने में असमर्थ थे।हालांकि अपने नवजात शिशु से दूर जाते-जाते पिता का दिल भर आया और तुरंत अनाथाश्रम की ओर चल पड़े।पास पहुंचे तो देखा कि नन्ही मीना के पूरे शरीर पर चीटियाँ काट रहीं थीं।अनाथाश्रम का दरवाज़ा बंद था, शायद अंदर सब सो गए थे।यह सब देख उस लाचार पिता की हिम्मत टूट गई,आँखों से आँसु बह निकले।झट से अपनी नन्हीं-सी जान को साफ़ किया और अपने दिल से लगा लिया।अली बक़्श अपनी चंद दिनों की बेटी को घर ले आए।समय के साथ-साथ शरीर के वो घाव तो ठीक हो गए किंतु मन में लगे बदकिस्मती के घावों ने अंतिम सांस तक मीना का साथ नहीं छोड़ा।
 
==टैगोर परिवार से संबंध==
मीना कुमारी की नानी हेमसुन्दरी मुखर्जी [[पारसी रंगमंच]] से जुड़ी हुईं थी। [[बंगाल]] के प्रतिष्ठित टैगोर परिवार के पुत्र जदुनंदन टैगोर (1840-62) ने परिवार की इच्छा के विरूद्ध हेमसुन्दरी से विवाह कर लिया। 1862 में दुर्भाग्य से जदुनंदन का देहांत होने के बाद हेमसुन्दरी को बंगाल छोड़कर [[मेरठ]] आना पड़ा। यहां अस्पताल में नर्स की नौकरी करते हुए उन्होंने एक [[उर्दू]] के पत्रकार प्यारेलाल शंकर मेरठी (जो कि ईसाई था) से शादी करके [[ईसाई]] धर्म अपना लिया। हेमसुन्दरी की दो पुत्री हुईं जिनमें से एक प्रभावती, मीना कुमारी की माँ थीं।
 
==फ़िल्मी सफर व निजी जीवन==
===शुरुआती फिल्में (1939-52)===
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