"मीना कुमारी" के अवतरणों में अंतर

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लेकिन स्वछंद प्रवृति की मीना अमरोही से [[1964]] में अलग हो गयीं। उनकी फ़िल्म [[पाक़ीज़ा]] को और उसमें उनके रोल को आज भी सराहा जाता है। शर्मीली मीना के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि वे कवियित्री भी थीं लेकिन कभी भी उन्होंने अपनी कवितायें छपवाने की कोशिश नहीं की। उनकी लिखी कुछ उर्दू की कवितायें नाज़ के नाम से बाद में छपी।
 
==मृत्यु==
फ़िल्म [[पाक़ीज़ा (1972 फ़िल्म)|पाक़ीज़ा]] के रिलीज़ होने के तीन हफ़्ते बाद मीना कुमारी की तबीयत बिगड़ने लगी। 28 मार्च 1972 को उन्हें [[मुम्बई|बम्बई]] के सेंट एलिज़ाबेथ अस्पताल में दाखिल करवाया गया।
 
31 मार्च 1972, गुड फ्राइडे वाले दिन दोपहर 3 बजकर 25 मिनट पर महज़ 38 वर्ष की आयु में मीना कुमारी ने अंतिम सांस ली। पति कमल अमरोही की इच्छानुसार उन्हें [[मुम्बई|बम्बई]] के [[मज़गांव]] स्थित रहमताबाद कब्रिस्तान में दफनाया गया। मीना कुमारी इस लेख को अपनी कब्र पर लिखवाना चाहती थीं:
{{Quote|''"वो अपनी ज़िन्दगी को''
''एक अधूरे साज़,''
 
''एक अधूरे गीत,''
 
''एक टूटे दिल,''
 
''परंतु बिना किसी अफसोस''
 
''के साथ छोड़ गई"''
(अंग्रेज़ी से अनुवादित)}}
 
== मीना की फ़िल्में ==
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