मुख्य मेनू खोलें

बदलाव

413 बैट्स् जोड़े गए ,  1 वर्ष पहले
सम्पादन सारांश रहित
{{स्रोतहीन|date=सितंबर 2012}}
{{पात्र ज्ञानसन्दूक}}
'''सीता''' [[रामायण]] और रामकथा पर आधारित अन्य रामायण ग्रंथ, जैसे [[रामचरितमानस]], की मुख्य पात्र है। सीता [[मिथिला]] के [[राजा जनक]] की ज्येष्ठ पुत्री थी। इनका विवाह [[अयोध्या]] के [[राजा दशरथ]] के ज्येष्ठ पुत्र [[राम]] से [[स्वयंवर]] में [[शिवधनुष]] को भंग करने के उपरांत हुआ था। इनकी स्त्री व पतिव्रता धर्म के कारण इनका नाम आदर से लिया जाता है। त्रेतायुग में इन्हे सौभाग्य की देवी [[लक्ष्मी]] का [[अवतार]] मानते हैं।<ref>{{cite book |last1=Buck |first1=William |title=Ramayana |date=2000 |publisher=Motilal Banarsidass Publ. |isbn=9788120817203 |url=https://books.google.co.in/books?id=vvuIp2kqIkMC&pg=PA70&dq=ramayana+dasratha&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjYjbHn0LncAhXGi7wKHbmCCMQQ6AEIPjAE#v=onepage&q=ramayana%20dasratha&f=false |accessdate=25 जुलाई 2018 |language=en}}</ref>
 
== जन्म व नाम ==
पंचवटी में लक्ष्मण से अपमानित [[शूर्पणखा]] ने अपने भाई [[रावण]] से अपनी व्यथा सुनाई और उसके कान भरते कहा "सीता अत्यंत सुंदर है और वह तुम्हारी पत्नी बनने के सर्वथा योग्य है।" रावण ने अपने मामा [[मारीच]] के साथ मिलकर सीता अपहरण की योजना रची। इसके अनुसार मारीच सोने के हिरण का रूप धर राम व लक्ष्मण को वन में ले जायेगा और उनकी अनुपस्थिति में रावण सीता का अपहरण करेगा। अपहरण के बाद आकाश मार्ग से जाते समय पक्षीराज [[जटायु]] के रोकने पर रावण ने उसके पंख काट दिये।
 
जब कोई सहायता नहीं मिली तो सीताजी ने अपने पल्लू से एक भाग निकालकर उसमें अपने आभूषणों को बांधकर नीचे डाल दिया। नीचे वनमे कुछ वानरों ने इसे अपने साथ ले गये। रावण ने सीता को [[लंका|लंकानगरी]] के [[अशोकवाटिका]] में रखा और [[त्रिजटा]] के नेतृत्व में कुछ राक्षसियों को उसकी देख-रेख का भार दिया।
 
रावण ने सीता को [[लंका|लंकानगरी]] के [[अशोकवाटिका]] में रखा और [[त्रिजटा]] के नेतृत्व में कुछ राक्षसियों को उसकी देख-रेख का भार दिया।
 
== हनुमानजी की भेंट ==
हनुमानजी ने रावण को अपनी दुस्साहस के परिणाम की चेतावनी दी और लंका जलाया। माता सीता से चूड़ामणि व अपनी यात्रा की अनुमति लिए चले। सागरतट स्थित अंगद व वानरसेना लिए श्रीरामजी के पास पहुँचे। माता सीता की चूड़ामणि दिया और अपनी लंका यात्रा की सारी कहानी सुनाई। इसके बाद राम व लक्ष्मण सहित सारी वानरसेना युद्ध के लिए तैयार हुई।
 
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
 
==बाहरी कड़ियाँ==
{{श्री राम चरित मानस}}
{{हिन्दू-पुराण-आधार}}