"जनसंचार" के अवतरणों में अंतर

94 बैट्स् नीकाले गए ,  2 वर्ष पहले
छो
106.204.52.182 (Talk) के संपादनों को हटाकर 106.204.62.14 के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
छो (106.204.52.182 (Talk) के संपादनों को हटाकर 106.204.62.14 के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया)
टैग: प्रत्यापन्न
सिनेमा की अपील पूरी तरह से सार्वभौमिक है। सिनेमा निर्माण के अन्य केंद्रों की उपलब्धियों पर यद्यपि हालीवुड भारी पड़ता है, तथापि भारत में विश्व में सबसे अधिक फिल्में बनती हैं। सिनेमा आसानी से नई तकनीक आत्मसात कर लेता है। इसने अपने कलात्मक क्षेत्र का विस्तार मूक सिनेमा (मूवीज) से लेकर सवाक् सिनेमा (टाकीज]], रंगीन सिनेमा, 3डी सिनेमा, स्टीरियो साउंड, वाइड स्क्रीन और आई मेक्स तक किया है। सिनेमा के तरह-तरह के आलोचक भी है। दरअसल जब अमेरिका में पहली बार सिनेमा मे ध्वनि का प्रयोग किया गया था, उन्हीं दिनों 1928 में, चैप्लिन ने ‘सुसाइड ऑफ सिनेमा’ नामक एक लेख लिखा। उन्होंने उसमें लिखा था कि ध्वनि के प्रयोग से सुरुचिविहीन नाटकीयता के लिए द्वार खुल जाएंगे और सिनेमा की अपनी विशिष्ट प्रकृति इसमें खो जाएगी। आइंसटाइन (मोंताज) डी. डब्ल्यू. ग्रिफिथ (क्लोजअप) और नितिन बोस (पार्श्व गायन) जैसे दिग्गजों के योगदान से विश्व सिनेमा समृद्ध हुआ है। दूसरे देशों की तकनीकी प्रगति का मुकाबला भारत सिर्फ़ अपने हुनर और नए-नए प्रयोगों से कर पाया है। सिनेमा आज विश्व सभ्यता के बहुमूल्य खजाने का अनिवार्य हिस्सा है। हालीवुड से अत्यधिक प्रभावित होने के बावजूद भारतीय सिनेमा ने अपनी लंबी विकास यात्रा में अपनी पहचान, आत्मा और दर्शकों को बचाए रखा है।
 
== इन्हें भी देखें==
Gansanchar ke madhayam se aap kya samjate hai?
* [[पत्रकारिता का इतिहास|पत्रकारिता]]
Ve upkaran ya sadhan jeskep davara suchna,gatna ya sandes ko aek sathan se dusre sathan bhega gaya jata hai.
 
Gansanchar ke vivid-parkaro par parkash daleye?
[[श्रेणी:पत्रकारिता]]
1.Sanketik
2.Mokhek
3.Amokhek
4.Anta:vayktitav
5.Antar vayktitav
6.Samuh
7.Gansanchar