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'''कांकिल राय चरित्र '''
:श्री दुलहराय माघ शुक्ला सप्तमी विक्रमी सं॰ १०९३ को स्वर्ग सिधारे एवं उनके उपरान्त उनके बडे पुत्र कांकिल राय का राज्याभिषेक हुआहुआ। ।वेवे भी प्रसिद्ध राजा हुए।
;चौपाई:
{{cquote|कांकिल पाय पिता ते ज्ञाना। मां जमुवाय करे नित ध्याना।।<br>सुंसावत कुल भत्तोरावा। मीना समाज ही सकल बुलावा।।|20px||जमुवाय गाथा}}