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====== अन्य कथा ======
राजा [[रामचन्द्र]] के पुत्र [[कुश]] के वंशज शासक [[नरवर दुर्ग|नरवर]] के सोढ़ा सिंह के पुत्र दुलहराय ने लगभग सन् ११३७ ई॰ में तत्कालीन रामगढ़ (ढूंढाड़) में मीणाओं को युद्ध में मात दी तथा बाद में [[दौसा]] के बड़गूजरों को पराजित कर कछवाहा वंश का राज्य स्थापित किया। तब उन्होंने रामगढ़ मे अपनी कुलदेवी जमुवाय माता का मंदिर बनवाया। इनके पुत्र कांकिल देव ने सन् १२०७ में आमेर पर राज कर रहे मीणाओं को परास्त कर अपने राज्य मेमें विलय कर लिया व उसे अपनी राजधानी बनाया। तभी से आमेर कछवाहों की राजधानी बना और नवनिर्मित नगर जयपुर के निर्माण&nbsp;तक बना रहा। इसी वंश के शासक पृथ्वीराज मेवाड़ के [[महाराणा सांगा]] के सामन्त थे जो खानवा के युद्ध में सांगा की ओर से लड़े थे। पृथ्वीराज स्वयं [[गलताजी|गलता]] के [[श्री वैष्णव संप्रदाय]] के संत [[कृष्णदास पयहारी]] के अनुयायी थे । इन्हीं के पुत्र सांगा ने [[सांगानेर]] कस्बा बनाया।<ref>{{cite web|url=http://connectrajasthan.com/history-of-amer-kachwah/|title=आमेर के कच्छवाहो का इतिहास|accessmonthday=|accessdate= १२ मार्च २०१८ |last=|first=|authorlink=|coauthors= |date=|year=|month=|format=|work= |publisher=|pages= |language=|archiveurl=|archivedate=|quote=}}</ref>
 
==अभिन्यास==