"नालन्दा महाविहार" के अवतरणों में अंतर

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[[चित्र:Nalanda University India ruins.jpg|thumb|250px|नालंदा के प्राचीन विश्वविद्यालय के अवशेष।]]
 
यह प्राचीन [[भारत]] में उच्च शिक्षा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विख्यात केन्द्र था। [[महायान]] [[बौद्ध धर्म]] के इस शिक्षा-केन्द्र में [[हीनयान]] बौद्ध-धर्म के साथ ही अन्य धर्मों के तथा अनेक देशों के छात्र पढ़ते थे। वर्तमान [[बिहार]] राज्य में [[पटना]] से ८८.५ किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और [[राजगीर]] से ११.५ किलोमीटर उत्तर में एक गाँव के पास [[अलेक्जेंडर कनिंघम]] द्वारा खोजे गए इस महान बौद्ध विश्वविद्यालय के भग्नावशेषभवनावशेष इसके प्राचीन वैभव का बहुत कुछ अंदाज़ करा देते हैं। अनेक पुराभिलेखों और सातवीं शताब्दी में [[भारत]] भ्रमण के लिए आये चीनी यात्री [[ह्वेनसांग]] तथा [[इत्सिंग]] के यात्रा विवरणों से इस विश्वविद्यालय के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है। यहाँ १०,००० छात्रों को पढ़ाने के लिए २,००० शिक्षक थे।
प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने ७ वीं शताब्दी में यहाँ जीवन का महत्त्वपूर्ण एक वर्ष एक विद्यार्थी और एक शिक्षक के रूप में व्यतीत किया था।
प्रसिद्ध 'बौद्ध सारिपुत्र' का जन्म यहीं पर हुआ था।
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