"समुद्र मन्थन" के अवतरणों में अंतर

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इस तरह देवताओं को अमृत पिलाकर भगवान विष्णु वहाँ से लोप हो गये। उनके लोप होते ही दैत्यों की मदहोशी समाप्त हो गई। वे अत्यन्त क्रोधित हो देवताओं पर प्रहार करने लगे। भयंकर देवासुर संग्राम आरम्भ हो गया जिसमें देवराज इन्द्र ने दैत्यराज बालि को परास्त कर अपना इन्द्रलोक वापस ले लिया।
 
समुद्र मंथनमें निकले रत्नों के आधार पर इस घटना को समय के हिसाब से व्यक्त किया जाय तो बहूत विरोधाभास होता है दुर्वासा ऋषि का काल अलग था और राजा बलि का काल अलग था और चन्द्रमा निकलने को आधार माना जाय तो हो सकता पॄथ्वी पर विशाल धूलकणों के बादल से तब चंद्रमा न दिखता हो और समुद्र मंथन से वे धूल के बादल हट गये हों जिससे चंद्रमा के रोशनी फिर से पॄथ्वी पर पड़नी शुरू हों गयी हो । यदि ऐसा हुआ होगा तो समुद्र मंथन आज़ से 26 हजार साल पूर्व हुआ होगा
 
== चौदह रत्न ==
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