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===ट्रैजेडी क्वीन===
[[1957]] में मीना कुमारी दो फिल्मों में पर्दे पर नज़र आईं। प्रसाद द्वारा कृत पहली फ़िल्म ''[[मिस मैरी (1957 फ़िल्म)|मिस मैरी]]'' में कुमारी ने [[दक्षिण भारत]] के मशहूर अभिनेता [[जेमिनी गणेशन]] और [[किशोर कुमार]] के साथ काम किया। प्रसाद द्वारा कृत दूसरी फ़िल्म ''[[शारदा (1957 फ़िल्म)|शारदा]]'' ने मीना कुमारी को भारतीय सिनेमा की ट्रेजेडी क्वीन बना दिया। यह उनकी [[राज कपूर]] के साथ की हुई पहली फ़िल्म थी। जब उस ज़माने की सभी अदाकाराओं ने इस रोल को करने से मन कर दिया था तब केवल मीना कुमारी ने ही इस रोल को स्वीकार किया था और इसी फिल्म ने उन्हें उनका पहला '''बंगाल फ़िल्म जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री''' का खिताब दिलवाया। लेकिन स्वछंद प्रवृति की मीना अमरोही से [[1964]] में अलग हो गयीं। उनकी फ़िल्म [[पाक़ीज़ा]] को और उसमें उनके रोल को आज भी सराहा जाता है। शर्मीली मीना के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि वे कवियित्री भी थीं लेकिन कभी भी उन्होंने अपनी कवितायें छपवाने की कोशिश नहीं की। उनकी लिखी कुछ उर्दू की कवितायें नाज़ के नाम से बाद में छपी।
 
'''<big>शाइरी से सम्बन्धित एक दिलचस्प वाक़या</big>'''
लेकिन स्वछंद प्रवृति की मीना अमरोही से [[1964]] में अलग हो गयीं। उनकी फ़िल्म [[पाक़ीज़ा]] को और उसमें उनके रोल को आज भी सराहा जाता है। शर्मीली मीना के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि वे कवियित्री भी थीं लेकिन कभी भी उन्होंने अपनी कवितायें छपवाने की कोशिश नहीं की। उनकी लिखी कुछ उर्दू की कवितायें नाज़ के नाम से बाद में छपी।
 
शाइरी से सम्बन्धित मीरा कुमारी और फ़िराक़ गोरखपुरी से जुड़ा एक दिलचस्प वाक़या 1960 के आसपास का है। जब फ़िराक़ (असली नाम 'रघुपति सहाय') को एक मुशायरे में आमंत्रित किया गया। ‘फ़िराक़ गोरखपुरी: द पोयट ऑफ पेन एंड एक्सटैसी’ नामक पुस्तक में इस वाक़ये का जिक्र किया गया है। फ़िराक़ की जीवनी के लेखक खुद उनके रिश्तेदार अजय मानसिंह हैं। एक बार जाने-माने शायर फ़िराक़ गोरखपुरी ने महज़ इसलिए मुशायरा छोड़ दिया था कि उन्होंने देखा मुशायरे में अभिनेत्री मीरा कुमारी शामिल हो रही हैं। उनका मानना था कि, "मुशायरे सिर्फ शायरों की जगह हैं।"
 
जब फ़िराक़ मुशायरा स्थल पर पहुंचे तो उनका तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया गया और मुशायरे की शुरुआत पूरे जोशो-खरोश के साथ हुई। करीब एक घंटे के बाद वहां ऐलान किया गया कि मौके पर अदाकारा मीना कुमारी पहुंच चुकी हैं। मुशायरे में शामिल लोग शायरों को मंच पर छोड़कर मीना कुमारी की झलक पाने के लिए भागे।
 
इससे नाराज फ़िराक़ ने मौके से जाने का फैसला किया। इस पर आयोजक उन्हें मनाने की कोशिश में जुट गए। मीना कुमारी ने भी शर्मिंदगी महसूस की और फ़िराक़ से बार-बार गुजारिश की कि वह रुकें। मीना कुमारी ने उनसे कहा, "जनाब, मैं आपको सुनने के लिए आई हूं।" फ़िराक़ ने इस पर तुरंत जवाब दिया, "मुशायरा मुजरा बन चुका है. मैं ऐसी महफिल से ताल्लुक नहीं रखता।”
 
इसके एक दिन बार फ़िराक़ ने कहा, "मैं मीना कुमारी की वजह से वहां से नहीं हटा था। आयोजकों और दर्शकों के व्यवहार के कारण वहां से हटा, जिन्होंने हमारी बेइज्जती की थी।" उनकी दलील थी कि, "मुशायरा शायरी का मंच है। यहां के कलाकार सिर्फ शायर होते हैं और यहां की व्यवस्था में एक पदानुक्रम होता है जिसका पालन किया जाना चाहिए।”
 
यहाँ ये बता देना ज़रूरी है कि फ़िराक़ गोरखपुरी (मूल नाम रघुपति सहाय; 28 अगस्त 1896—3 मार्च 1982) उर्दू भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार है। उनका जन्म गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में कायस्थ परिवार में हुआ। इनकी शिक्षा अरबी, फारसी और अंग्रेजी में हुई।
 
'''<big>शा'यरा</big>''' '''<big>मीना कुमारी जी की दो ग़ज़लें</big>'''
 
'''(1.)'''
 
''आबला-पा कोई इस दश्त में आया होगा''
 
''वर्ना आँधी में दिया किस ने जलाया होगा''
 
''ज़र्रे ज़र्रे पे जड़े होंगे कुँवारे सज्दे''
 
''एक इक बुत को ख़ुदा उस ने बनाया होगा''
 
''प्यास जलते हुए काँटों की बुझाई होगी''
 
''रिसते पानी को हथेली पे सजाया होगा''
 
''मिल गया होगा अगर कोई सुनहरी पत्थर''
 
''अपना टूटा हुआ दिल याद तो आया होगा''
 
''ख़ून के छींटे कहीं पूछ न लें राहों से''
 
''किस ने वीराने को गुलज़ार बनाया होगा''
 
'''(2.)'''
 
''आग़ाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता''
 
''जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता''
 
''जब ज़ुल्फ़ की कालक में घुल जाए कोई राही''
 
''बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता''
 
''हँस हँस के जवाँ दिल के हम क्यूँ न चुनें टुकड़े''
 
''हर शख़्स की क़िस्मत में इनआ’म नहीं होता''
 
''दिल तोड़ दिया उस ने ये कह के निगाहों से''
 
''पत्थर से जो टकराए वो जाम नहीं होता''
 
''दिन डूबे है या डूबी बारात लिए कश्ती''
 
''साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता''
 
==मृत्यु==
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://www.3to6.com/final_retro/lmeenakumari1.htm मीना कुमारी की जीवनी (अंग्रेजी में)]
*[https://www.deepawali.co.in/meena-kumari-biography-hindi-%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80.html मीना कुमारी का जीवन परिचय (हिंदी में)]
* [http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A4%BE_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80 मीना कुमारी की रचनाएँ कविता कोश में]
*[https://www.pustak.org/index.php/books/bookdetails/7174 मीना कुमारी की शायरी—गुलजार]
*[https://www.bbc.com/hindi/entertainment-42718152 कमाल अमरोही ने ऐसे रचाई थी मीना कुमारी से शादी—प्रदीप कुमार (बीबीसी संवाददाता)]
 
{{फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार}}