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| जनसंख्या = ४२५४७८२
| घनत्व = ११६९
| क्षेत्रफल = २९०४ sq.वर्ग kmsकिमी.
| दूरभाष कोड = ९१(०)०६२७४
| पिनकोड = ८४८१०१
 
== नामाकरण ==
समस्तीपुर का परंपरागत नाम '''सरैसा''' है। इसका वर्तमान नाम मध्य कालमध्यकाल में [[बंगाल]] एवं उत्तरी बिहार के शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास (१३४५-१३५८ ईस्वी) के नाम पर पड़ा है। कुछ लोगों का मानना है कि इसका प्राचीन नाम सोमवती था जो बदलकर सोम वस्तीपुर फिर समवस्तीपुर और समस्तीपुर हो गया।
== इतिहास ==
समस्तीपुर राजा [[जनक]] के [[मिथिला]] प्रदेश का अंग रहा है। विदेह राज्य का अंतअन्त होने पर यह [[वैशाली]] गणराज्य का अंग बना। इसके पश्चात यह [[मगध]] के [[मौर्य]], [[शुंग]], [[कण्व]] और [[गुप्त]] शासकों के महान साम्राज्य का हिस्सा रहा। [[ह्वेनसांग]] के विवरणों से यह पता चलता है कि यह प्रदेश [[हर्षवर्धन]] के साम्राज्य के अंतर्गत था। १३ वीं सदी में पश्चिम [[बंगाल]] के मुसलमान शासक [[हाजी शम्सुद्दीन इलियास]] के समय [[मिथिला]] एवं [[तिरहुत]] क्षेत्रों का बँटवारा हो गया। उत्तरी भाग सुगौना के ओईनवार राजा (1325-1525 ईस्वी) के कब्जे में था जबकि दक्षिणी एवं पश्चिमी भाग शम्सुद्दीन इलियास के अधीन रहा। समस्तीपुर का नाम भी हाजी शम्सुद्दीन के नाम पर पड़ा है। शायद [[हिंदू]] और [[मुसलमान]] शासकों के बीच बँटा होने के कारण ही आज समस्तीपुर का सांप्रदायिक चरित्र समरसतापूर्ण है। [[ओईनवार]] राजाओं को कला, संस्कृति और साहित्य का बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। शिवसिंह के पिता देवसिंह ने लहेरियासराय के पास देवकुली की स्थापना की थी। शिवसिंह के बाद यहाँ पद्मसिंह, हरिसिंह, नरसिंहदेव, धीरसिंह, भैरवसिंह, रामभद्र, लक्ष्मीनाथ, कामसनारायण राजा हुए। शिवसिंह तथा भैरवसिंह द्वारा जारी किए गए सोने एवं चाँदी के सिक्के यहाँ के इतिहास ज्ञान का अच्छा स्रोत है। अंग्रेजी राज कायम होने पर सन १८६५ में [[तिरहुत]] मंडल के अधीन समस्तीपुर अनुमंडल बनाया गया। [[बिहार]] राज्य जिला पुनर्गठन आयोग के रिपोर्ट के आधार पर इसे [[दरभंगा]] प्रमंडल के अंतर्गत १४ नवम्बर १९७२ को जिला बना दिया गया। अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध हुए स्वतंत्रता आंदोलन में समस्तीपुर के क्रांतिकारियों ने महती भूमिका निभायी थी। यहाँ से [[कर्पूरी ठाकुर]] बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं।
 
[[ओईनवार]] राजाओं को कला, संस्कृति और साहित्य का बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। शिवसिंह के पिता देवसिंह ने लहेरियासराय के पास देवकुली की स्थापना की थी। शिवसिंह के बाद यहाँ पद्मसिंह, हरिसिंह, नरसिंहदेव, धीरसिंह, भैरवसिंह, रामभद्र, लक्ष्मीनाथ, कामसनारायण राजा हुए। शिवसिंह तथा भैरवसिंह द्वारा जारी किए गए सोने एवं चाँदी के सिक्के यहाँ के इतिहास ज्ञान का अच्छा स्रोत है। अंग्रेजी राज कायम होने पर सन १८६५ में [[तिरहुत]] मंडल के अधीन समस्तीपुर अनुमंडल बनाया गया। [[बिहार]] राज्य जिला पुनर्गठन आयोग के रिपोर्ट के आधार पर इसे [[दरभंगा]] प्रमंडल के अंतर्गत १४ नवम्बर १९७२ को जिला बना दिया गया। अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध हुए स्वतंत्रता आंदोलन में समस्तीपुर के क्रांतिकारियों ने महती भूमिका निभायी थी। यहाँ से [[कर्पूरी ठाकुर]] बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं।
 
== भूगोल ==
समस्तीपुर २५.९० उत्तरी अक्षांश एवं ८६.०८ पूर्वी देशांतर पर अवस्थित है। सारा जिला उपजाऊ मैदानी क्षेत्र है किंतु हिमालय से निकलकर बहनेवाली नदियाँ बरसात के दिनों में बाढ़ लाती है।
 
* '''नदियाँ''' : समस्तीपुर जिले के मध्य से [[बुढी गंडक]] नदी, उत्तर में [[बागमती]] नदी एवं दक्षिणी तट पर [[गंगा]] बहती है। इसके अलावा यहाँ से बांया भाग में, जमुआरी, नून, करेह और शान्ति नदी भी बहती है जो बरसात के दिनों में उग्र रूप धारण कर लेती है।
* प्रशासनिक विभाजन: यह जिला ४ तहसीलो (अनुमंडल), २० प्रखंडों, ३८० पंचायतों तथा १२४८ गाँवों में बँटा है।
 
* '''प्रशासनिक विभाजन''': यह जिला ४ तहसीलो (अनुमंडल), २० प्रखंडों, ३८० पंचायतों तथा १२४८ गाँवों में बँटा है।
 
'''अनुमंडल'''- [[दलसिंह सराय]], [[पटोरी (समस्तीपुर)|शाहपुर पटोरी]], [[रोसड़ा (समस्तीपुर)|रोसड़ा]], समस्तीपुर सदर<br />
 
'''प्रखंड'''- दलसिंहसराय, उजियारपुर, विद्यापतिनगर, पटोरी, मोहनपुर, मोईनुद्दीननगर, रोषड़ा, हसनपुर, बिथान, सिंघिया, विभूतीपुर, [[शिवाजीनगर प्रखण्ड (समस्तीपुर)|शिवाजीनगर]], समस्तीपुर, कल्यानपुर, वारिसनगर, खानपुर, पूसा, ताजपुर, मोरवा, सरायरंजन
 
* स्त्री-पु‍रुष अनुपातः ९२८ प्रति १०००<ref name=":0" />
* घनत्वः ११६९ प्रति वर्ग किलोमीटर
; ===महत्वपूर्ण व्यक्तित्वःव्यक्तित्व===
* दार्शनिकः'''दार्शनिक''' : [[गदाधर पंडित]], शंकर, वाचास्पति[[वाचस्पति मिश्र]], [[उदयनाचार्य]], अमर्त्यकार, अमियकर आदि
 
* '''स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ''' : पंडित यमुना कर्जी (किसान नेता [[स्वामी सहजानन्द सरस्वती]] के सहयोगी), [[सत्य नारायण सिन्हा]] (पूर्व राज्यपाल एवं चार बार लोक सभा सदस्य), [[कर्पूरी ठाकुर]] (दो बार [[बिहार]] के [[मुख्यमंत्री]]), [[बलिराम भगत]] (पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं [[लोकसभा]] अध्यक्ष), [[गया प्रसाद शर्मा]] (स्वतंत्रता संग्राम में ११ बार जेल गये), [[रामविलास पासवान]] ([[हाजीपुर]] से चार बार [[लोकसभा]] सदस्य एवं [[लोक जनशक्ति पार्टी]] के अध्यक्ष), सैय्यद शाहनवाज हुसैन ([[भारतीय जनता पार्टी]] नेता एवं सांसद), रामनाथ ठाकुर (कर्पूरी ठाकुर के पुत्र एवं विधायक)
* साहित्यकार एवं कलाकारः महान मैथिली कवि [[विद्यापति]], बिहार कोकिला मैथिली गायिका [[शारदा सिन्हा]]
 
* '''साहित्यकार एवं कलाकारःकलाकार''' : महान मैथिली कवि [[विद्यापति]], बिहार कोकिलाबिहारकोकिला मैथिली गायिका [[शारदा सिन्हा]]
 
== शिक्षा ==
 
== पर्यटन स्थल ==
'''बन्दा''' ।।: बन्दा समस्तीपुर जिला का सबसे अच्छा और विद्वानों का स्थल माना जाता है। बन्दा मैं एक विशाल मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। जिसका नाम मानस मंदिर बन्दा के नाम से जाना जाता है।।। बन्दा के नेता कहलाने वाले राधा कांत रॉय , राम प्रताप रॉय , विश्व्नाथ रॉय , नागेंद्र रॉय।।। बन्दा के वर्तमान चमन शांडिल्य जी जो अभी अपनी पढ़ाई दरभंगा में कर रहे है।। बन्दा वासी की कोई भी समस्या हो वो अपनी समस्या गाँव के साथ बांटते है।। राधे राधे।। यहाँ की अमृत वाणी है।।।
 
* '''विद्यापतिनगर''': शिव के अनन्य भक्त एवं महान मैथिल कवि [[विद्यापति]] ने यहाँ [[गंगा]] तट पर अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। ऐसी मान्यता है कि अपनी बिमारी के कारण विद्यापति जब गंगातट जाने में असमर्थ थे तो [[गंगा]] ने अपनी धारा बदल ली और उनके आश्रम के पास से बहने लगी। वह आश्रम लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।
 
* '''बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर''': बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर, ग्राम हरिहरपुर खेढ़ी, प्रखंड खानपुर, जिला समस्तीपुर, बिहार। यह बाबा का स्थान समस्तीपुर से 18 किलोमीटर दूर पुर्व दिशा मे स्थित हैं। इसी पंचायत मे मसिना कोठी हैं जो अंग्रेज के समय का कोठी हैं यहाँ पर उस समय मैं नील की खेती करवाते थे लेकिन देश आजाद होने के बाद यहाँ पर अब मक्के की खेती एवं अन्य फसल का अनुसन्धान केंद्र बन गया हैं यहाँ के द्वारा तैयार किया हुआ बीज दूर दूर तक पहुचाया जाता हैं। इसके निकट के गाँव भोरेजयराम हैं जिसकी खेती करने का जमीन २२ सो एकर के आस पास हैं जहा मक्के की खेती की जाती है। यह स्थान बूढी गंडक नदी के तटबंध किनारे स्थित हैं। इस मंदिर का निर्माण बछौली मुरियारो के स्वर्गीय धोली महतो ने अपनी मनोकामना पूर्ण हो जाने के बाद कराया था। इस मंदिर परिसर में बजरंगबली, माँ दुर्गा , श्री गणेश मंदिर भी है। यह मंदिर अपने शिवरात्री महोत्सव के लिये भी काफी प्रसिद्ध है। इस मन्दिर का उल्लेख होली के समय आकाशवाणी से प्रसारित गानो मे भी होता है। स्थानीय लोगों में इस मंदिर की बड़ी प्रतिष्ठा है और लोगों में ऐसा विश्वास है कि यहाँ पूजा करने से मनोवांछित फल मिलता है।
 
* '''करियनः''' महामहिषी कुमारिलभट्ट के शिष्य महान दार्शनिक उदयनाचार्य का जन्म ९८४ ईस्वी में शिवाजीनगर प्रखंड के करियन गाँव में हुआ था। उदयनाचार्य ने न्याय, दर्शन एवं तर्क के क्षेत्र में लक्षमणमाला, न्यायकुशमांजिली, आत्मतत्वविवेक, किरणावली आदि पुस्तकें लिखी जिनपर अनगिनत संस्थानों में शोध चल रहा है। दुर्भाग्य से यह महत्वपूर्ण स्थल सरकार की उपेक्षा का शिकार है।<ref>[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html] उदयनाचार्य की जन्मभूमि पर जागरण समाचार</ref>
 
* '''मालीनगर:''' यहाँ १८४४ में बना शिवमंदिर है जहाँ प्रत्येक वर्ष रामनवमी को मेला लगता है। मालीनगर [[हिंदी साहित्य]] के महान साहित्यकार [[बाबू देवकी नन्दन खत्री]] एवं शिक्षाविद राम सूरत ठाकुर की जन्म स्थली भी है।<ref>[http://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur] अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर</ref>
 
* '''मंगलगढ:''' यह स्थान हसनपुर से १४ किलोमीटर दूर है जहाँ प्राचीन किले का अवशेष है। यहाँ के स्थानीय शासक मंगलदेव के निमंत्रण पर [[महात्मा बुद्ध]] संघ प्रचार के लिए आए थे। उन्होंने यहाँ रात्रि विश्राम भी किया था। जिस स्थान पर बुद्ध ने अपना उपदेश दिया था वह बुद्धपुरा कहलाता था जो अब अपभ्रंश होकर दूधपुरा हो गया है।
 
* '''जगेश्वरस्थान''' (बिभूतिपुर): नरहन रेलवे स्टेशन से १५ किलोमीटर की दूरी पर बिभूतिपुर में जगेश्वरीदेवी का बनवाया शिव मंदिर है। अंग्रेजों के समय का नरहन एक रजवाड़ा था जिसका भव्य महल बिभूतिपुर में मौजूद है। जगेश्वरी देवी नरहन स्टेट के वैद्य भाव मिश्र की बेटी थी।
* '''मोरवा अंचल''' में कुंदनेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना एक मुस्लिम द्वारा यहाँ शिवलिंग मिलने पर की गयी थी। मंदिर के साथ ही महिला मुस्लिम संत की मजार हिंदू और मुस्लिम द्वारा एक साथ पूजित है
 
* '''मुसरीघरारी:''' [[राष्ट्रीय राजमार्ग 28]] पर स्थित यह एक कस्बा है जहाँ का मुहरर्म तथा दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन होता है।
 
* singhia hanuman mandir
* '''संत दरियासाहेब का आश्रम:''' बिहार के सूफी संत दरिया साहेब का आश्रम जिले के दक्षिणी सीमा पर गंगा तट पर बसा गाँव धमौन में बना है। यहाँ निरंजन स्वामी का मंदिर भी है।
 
* '''थानेश्वर शिवमंदिर''', खाटू-श्याम मंदिर एवं कालीपीठ समस्तीपुर जिला मुख्यालय का महत्वपूर्ण पूजा स्थल है।
 
* ''' धोवगामा"मॉमाँ सती का मंदिर''' : धोवगामा स्थित 500 500सालवर्ष पुराना मंदिर
*रंजितपुर -माँ वैष्णवी मंदिर"' यह समस्तीपुर से १५ किलो मीटर पूरब रंजितपुर गांव में यह मंदिर स्थित है,यहां चैती नवरात्रि में माता रानी की पूजा एवं भव्य मेला का आयोजन किया जाता हैं, यहां की मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से पूजते है उनके हरेक मनोकामना पूर्ण होती है!
 
*किशनपुर बैकुंठ - यह समस्तीपुर जिले से 23 किलोमीटर दूर वारिसनगर प्रखंड के अंतर्गत बसंतपुर रमणी पंचायत का एक संतोषजनक शिक्षित गाँव, और यहाँ दर्शनयोग्य *श्री बाबा बैकुंठनाथ महादेव मंदिर है जिसके बारे में लोककथा यह है कि एक बार एक व्यक्ति जहर खाये एक व्यक्ति को उसके परिजनों ने यहाँ लाया तो उसके स्वास्थ्य में सुधार आने लगा।
*रंजितपुर '''रंजितपुर-माँ वैष्णवी मंदिर"' यह समस्तीपुर से १५ किलो मीटर पूरब रंजितपुर गांव में यह मंदिर स्थित है,यहांहै। यहाँ चैती नवरात्रि में माता रानी की पूजा एवं भव्य मेला का आयोजन किया जाता हैं, यहां की मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से पूजते है उनके हरेक मनोकामना पूर्ण होती है!
*माँ काली शक्तिपीठ भी यहाँ दर्शन योग्य है जिसका स्थापना सन 1964 में किया गया था।
 
*'''किशनपुर बैकुंठ''' - यह समस्तीपुर जिले से 23 किलोमीटर दूर वारिसनगर प्रखंड के अंतर्गत बसंतपुर रमणी पंचायत का एक संतोषजनक शिक्षित गाँव, और यहाँ दर्शनयोग्य *श्री बाबा बैकुंठनाथ महादेव मंदिर है जिसके बारे में लोककथा यह है कि एक बार एक व्यक्ति जहर खाये एक व्यक्ति को उसके परिजनों ने यहाँ लाया तो उसके स्वास्थ्य में सुधार आने लगा।
 
*'''माँ काली शक्तिपीठ''' भी यहाँ दर्शन योग्य है जिसका स्थापना सन 1964 में किया गया था।
 
== यातायात सुविधाएँ ==
; सड़क मार्ग:
समस्तीपुर [[बिहार]] के सभी मुख्य शहरों से राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ से वर्तमान में दो राष्ट्रीय राजमार्ग तथा तीन राजकीय राजमार्ग गुजरते हैं। [[मुजफ्फरपुर]], [[मोतिहारी]] होते हुए [[लखनऊ]] तक जानेवाली [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८]] है। [[राष्ट्रीय राजमार्ग 103]] जिले को चकलालशाही, जन्दाहा, [[चकसिकन्दर]] होते हुए [[वैशाली]] जिले के मुख्यालय [[हाजीपुर]] से जोड़ता है। हाजीपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर महात्मा गाँधी सेतु से होकर राजधानी [[पटना]] जाया जाता है। जिले में राजकीय राजमार्ग संख्या ४९, ५० तथा ५५ की कुल लंबाई ८७ किलोमीटर है।
 
; रेल मार्गःमार्ग
समस्तीपुर [[भारतीय रेल]] के [नक्शे] का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है। यह [[पूर्व मध्य रेलवे]] का एक मंडल है। दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर स्थित रेल लाईनें एक ओर शहर को [[मुजफ्फरपुर]],[[हाजीपुर]], [[छपड़ा]] होते हुए [[दिल्ली]] से और दूसरी ओर [[बरौनी]], [[कटिहार]] होते हुए [[गुवाहाटी]] से जोड़ती है। इसके अतिरिक्त यहाँ से [[मुम्बई]], [[चेन्नई]], [[कोलकाता]], [[अहमदाबाद]], [[जम्मू]], [[अमृतसर]], [[गुवाहाटी]] तथा अन्य महत्वपूर्ण शहरों के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध है।
 
; वायु मार्गःमार्ग
समस्तीपुर का निकटस्थ हवाई अड्डा ६५ किलोमीटर दूर [[पटना]] में स्थित है। [[लोकनायक जयप्रकाश हवाई क्षेत्र]] पटना (IATA कोड- PAT) से अंतर्देशीय तथा सीमित अन्तर्राष्ट्रीय उड़ाने उपलब्ध है। [[इंडियन]], किंगफिशर, जेट एयर, स्पाइस जेट तथा इंडिगो की उडानें [[दिल्ली]], [[कोलकाता]] और [[राँची]] के लिए उपलब्ध हैं।
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== सन्दर्भ ==