"सर्पदंश": अवतरणों में अंतर

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== उपचार ==
सर्पदंश का प्राथमिक उपचार शीघ्र से शीध्र करना चाहिए। दंशस्थान के कुछ ऊपर और नीचे रस्सी, रबर या कपड़े से ऐसे कसकर बाँध देना चाहिए लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि धमनी का रुधिर प्रवाह भीधीरे रुकहो जाए।जाये लाललेकिन गरमरुके चाकूनहीं। सेकाटे दंशस्थानगये कोस्थान 1/2पर इंचकिसी लंबाचीज़ औरद्वारा 1/4कस इंचकर चौड़ाबांधे चीरकरजाने वहाँपर काउस रक्तस्थान निकालपर देनाखुून चाहिए।का तत्पश्चात्संचार दंशस्थानरुक साबुन,सकता याहै नमकजिससे वहाँ के पानी,ऊतकाे याकाे 1रक्त प्रतिशतमिलना पोटाशबन्द परमैंगनेटहाे केजायेगा, विलयनजिससे सेऊतकाें धोनाकाे चाहिए।क्षति यदिपहुँच येसकती प्राप्यहै। किसी होंजहरीले तो पुरानी दीवारसाँप के चूनेकाटे कोजाने खुरचकरपर घावसंयम मेंरखना भरचाहिये देनाताकि चाहिए।ह्रदय कभीगति कभीतेज पोटाश परमैंगनेटहाे। साँप के कणोंकाटे कोजाने भीपर घावजहर सीधे खून में भरपहुँच कर रक्त कणिकाआे काे नष्ट करना प्रारम्भ कर देते हैंहै, ह्रदय गति तेज हाेने पर कुछजहर लोगोंतुरन्त कीही रक्त के माध्यम से रायह्रदय में इससेपहुँच विशेषकर लाभउसे नहींनुक़सान होता।पहुँचा सकता है। काटे जाने के बाद तुरन्त बाद काटे गये स्थान काे पानी से धाेते रहना चाहिये। यदि घाव में साँप के दाँत रह गए हों, तो उन्हें चिमटी से पकड़कर निकाल लेना चाहिए। प्रथम उपचार के बाद व्यक्ति को शीघ्र निकटतम अस्पताल या चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। वहाँ [[प्रतिदंश विष]] (antivenom) की सूई देनी चाहिए। दंशस्थान को पूरा विश्राम देना चाहिए। किसी दशा में भी गरम सेंक नहीं करना चाहिए। बर्फ का उपयोग कर सकते हैं। ठंडे पदार्थो का सेवन किया जा सकता है। घबराहट दूर करने के लिए रोगी को अवसादक औषधियाँ दी जा सकती हैं। श्वासावरोध में कृत्रिम श्वसन का सहारा लिया जा सकता है। चाय, काफी तथा दूध का सेवन कराया जा सकता है, पर भूलकर भी मद्य का सेवन नहीं कराना। अतः साँप के काटे जाने पर बिना घबराये तुरन्त ही नजदीकी प्रतिविष केन्द्र में जाना चाहिये।
िकसी जहरीले साँप के काटे जाने पर संयम रखना चािहये तािक ह्रदय गति तेज न हाे। साँप के काटे जाने पर जहर सीधे खून में पहुँच कर रक्त कणिकाआे काे नष्ट करना प्रारम्भ कर देते है, ह्रदय गति तेज हाेने पर पर जहर तुरन्त ही रक्त के माध्यम से ह्रदय में पहुँच कर उसे नुक़सान पहुँचा सकते हैं। काटे जाने के बाद तुरन्त बाद काटे गये स्थान काे पानी से धाेते रहना चाहिये। काटे गये स्थान काे किसी भी चीज़ से नहीं बांधना चािहये कयाेंकि साँप के काटने के तुरन्त बाद ही जहर खुन में मिल जाता है अतः कुछ बाधने या गरम चाकु द्वारा चीरा लगाने का काेई अर्थ नहीं है। काटे गये स्थान पर िकसी चीज़ द्वारा कस कर बांधे जाने पर उस स्थान पर खुून का संचार रुक सकता है जिससे वहाँ के ऊतकाे काे रक्त मिलना बन्द हाे जायेगा, जिससे ऊतकाे ़काे क्षति पहुच सकती है। अतः साँप के काटे जाने पर िबना घबराये तुरन्त ही नजदीकी प्रतििवष केन्द्र में जाना चाहिये।
 
== इन्हें भी देखें ==