"पुरुषार्थ" के अवतरणों में अंतर

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(हमारे प्राचीन ऋषि मुनियो ने मानव जीवन के चार प्रमुख उद्देश्य बताए है। और वे है- धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष। इन्ही को चार पुरूषार्थ कहते है। इन पुरूषार्थो का पालन करने से मनुष्य नैतिक जीवन व्यतीत करते हुए मोक्ष प्राप्त कर सकता है।)
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[[योगवासिष्ठ]] के अनुसार सद्जनो और शास्त्र के उपदेश अनुसार चित्त का विचरण ही पुरुषार्थ कहलाता है।|
भारतीय संस्कृति में इन चारों पुरूषार्थो का विशिष्ट स्थान रहा है ।वस्तुतः इन पुरूषार्थो ने ही भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिकता के साथ भौतिकता का एक अद्भुत समन्वय स्थापित किया है ।
 
पुरूषार्थ :-
हमारे प्राचीन ऋषि मुनियो ने मानव जीवन के चार प्रमुख उद्देश्य बताए है। और वे है- धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष। इन्ही को चार पुरूषार्थ कहते है। इन पुरूषार्थो का पालन करने से मनुष्य नैतिक जीवन व्यतीत करते हुए मोक्ष प्राप्त कर सकता है।
पुरुषार्थ + प्रार्थना = सफलता