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== अवसान ==
१३ वीं सदी तक इस विश्वविद्यालय का पूर्णतः अवसान हो गया। मुस्लिम इतिहासकार मिनहाज़ और तिब्बती इतिहासकार तारानाथ के वृत्तांतों से पता चलता है कि इस विश्वविद्यालय को तुर्कों के आक्रमणों से बड़ी क्षति पहुँची। तारानाथ के अनुसार तीर्थिकों और भिक्षुओं के आपसी झगड़ों से भी इस विश्वविद्यालय की गरिमा को भारी नुकसान पहुँचा। इसपर पहला आघात हुण शासक [[मिहिरकुल]] द्वारा किया गया। [[११९९]] में [[तुर्क]] आक्रमणकारी [[बख्तियार खिलजी]] ने इसे जला कर पूर्णतः नष्ट कर दिया।<ref name="सतीश"/> बताया जाता है कि जब इसे आग लगाई तब ये लगातार डेढ़ महीने तक जली थी। तब से हम भारतीयों का सम्पूर्ण ज्ञान जल कर राख हो गया है
 
== ऐतिहासिक उल्लेख ==
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