"दुष्टता से भरी हँसी" के अवतरणों में अंतर

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(विस्तार)
 
गैर-इंसानी पात्र जैसे कि [[गॉज़िला]] श्रंखला से [[राजा घिदोराह]] और [[देस्तोराह]] भी अपनी निराली दुष्टता से भरी हँसी रखते थे या फिर हँसी-जैसी ध्वनि निकालते थे। {{citation needed|date=दिसम्बर २०१५}}
 
==भारतीय साहित्य में दुष्टता से भरी हँसी का वर्णन==
[[मनु शर्मा]] द्वारा रचित लक्षागृह: कृष्ण की अत्मकथा में भी इस हँसी का धार्मिक परिदृश्य में वर्ण इस प्रकार से है:
{{Quote|...और कभी-कभी उस नाटक में तुम्हारे जैसा खलनायक भी नायक बन जाता है।' फिर वे जोर से हँसे। उनकी वह उन्मुक्त हँसी रुक्मिणी के स्वयंवर की ओर संकेत कर रही थी। हँसी थमते ही फिर वे बोलने लगे—'अपने मनोनुकूल वर चुनने के नारियों के अधिकार पर तो हमारे ...}}
 
==सन्दर्भ==
29,584

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