"दुष्टता से भरी हँसी" के अवतरणों में अंतर

 
==भारतीय साहित्य में दुष्टता से भरी हँसी का वर्णन==
[[मनु शर्मा]] द्वारा रचित लक्षागृह: कृष्ण की अत्मकथा में भी इस हँसी का धार्मिक परिदृश्य में वर्ण इस प्रकार से है<ref>[https://books.google.co.in/books?id=B49ZDwAAQBAJ&pg=PT69&lpg=PT69&dq=%E0%A4%96%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%95+%E0%A4%95%E0%A5%80+%E0%A4%B9%E0%A4%81%E0%A4%B8%E0%A5%80&source=bl&ots=5-ZuW_lmis&sig=pn73_oc8ByaG6BK7J_rjXIsKK5c&hl=hi&sa=X&ved=2ahUKEwjI_7rbosDdAhUJK48KHdg_CE4Q6AEwFXoECAIQAQ#v=onepage&q=%E0%A4%96%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%95%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B9%E0%A4%81%E0%A4%B8%E0%A5%80&f=false लक्षागृह (कृष्ण की अत्मकथा -IV), मनु शर्मा, प्रभात प्रकाशन]</ref>:
{{Quote|...और कभी-कभी उस नाटक में तुम्हारे जैसा खलनायक भी नायक बन जाता है।' फिर वे जोर से हँसे। उनकी वह उन्मुक्त हँसी रुक्मिणी के स्वयंवर की ओर संकेत कर रही थी। हँसी थमते ही फिर वे बोलने लगे—'अपने मनोनुकूल वर चुनने के नारियों के अधिकार पर तो हमारे ...}}
 
[https://books.google.co.in/books?id=B49ZDwAAQBAJ&pg=PT69&lpg=PT69&dq=%E0%A4%96%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%95+%E0%A4%95%E0%A5%80+%E0%A4%B9%E0%A4%81%E0%A4%B8%E0%A5%80&source=bl&ots=5-ZuW_lmis&sig=pn73_oc8ByaG6BK7J_rjXIsKK5c&hl=hi&sa=X&ved=2ahUKEwjI_7rbosDdAhUJK48KHdg_CE4Q6AEwFXoECAIQAQ#v=onepage&q=%E0%A4%96%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%95%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B9%E0%A4%81%E0%A4%B8%E0%A5%80&f=false लक्षागृह (कृष्ण की अत्मकथा -IV), मनु शर्मा, प्रभात प्रकाशन]
 
==सन्दर्भ==
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