"मोहन जोदड़ो" के अवतरणों में अंतर

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==विशेषताएँ==
 
मुअनजो-दड़ो की खूबी यह है कि इस आदिम शहर की सड़कों और गलियों में आप आज भी घूम-फिर सकते हैं। यहॉयहाँ की सभ्यता और संस्कृति का सामान भले ही अजायबघरों की शोभा बढ़ा रहें होहों, यह शहर जहाँ था आज भी वहीं है। यहाँ की दीवारें आज भी मजबूत हैं, आप यहाँ पर पीठ टिका कर सुस्ता सकते हैं। वह एक खंडहर क्यों न हो, किसी घर किकी देहरीदेहलीज़ पर पॉवपाँव रखकर आप सहसा -सहम सकतें हैं, रसोई की खिड़की पर खड़े होकर उसकी गंध महसूस कर सकतें है। या शहर के किसी सुनसान मार्ग पर कान देकर उस बैलगाड़ी की रून-झुन सुन सकते हैं जिसे आपने पुरातत्व की तसवीरो में मिट्टी के रंग में देखा है। सच है कि यहॉयहाँ किसी अॉगनआँगन की टूटी-फूटी सीढ़ियॉसीढ़ियाँ अब आपको कहीं नहीं ले जातीं; वे आकाश की तरफ़ अधूरीअधुरी रह जाती हैं। लेकिन उन अधूरे पायदानों पर खड़े होकर अनुभव किया जा सकता है कि आप दुनिया किकी छत पर हैं; वहॉवहाँ से आप इतिहास को नहीं, उसके वर्तमान पार झॉकझाँक रहें हैं। इसेयह नागर भारत का सबसे पुराना लैंडस्केपथल चिह्न कहा गया है। मुअनजो-दड़ो के सबसे खास हिस्से पर बौद्ध स्तूप है।हैं।
 
==प्रसिद्ध जल कुंड==
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