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== विश्व धरोहर घोषणा ==
राजस्थान सरकार ने जनवरी २०११ को राजस्थान के कुछ किलों को विश्व धरोहर में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजा था। उसके बाद यूनेस्को टीम की आकलन समिति के दो प्रतिनिघिप्रतिनिधि जयपुर आए और एएसआई व राज्य सरकार के अघिकारियों के साथ बैठक की। इन सबके पश्चात मई २०१३ में इसे विश्व धरोहर में शामिल कर लिया गया एवं इसकी औपचारिक घोषणा २१ जून २०१३ को की गई।<ref>[https://hi.pinkcity.com/2013/06/22/6-fortification-world-heritage-of-rajasthan/ राजस्थान के 6 दुर्ग विश्व विरासत] - पिंक सिटी समाचार पत्र | अभिगमन तिथि: १२ मार्च २०१८</ref><ref>[http://www.jagran.com/news/national-six-rajasthan-hill-forts-on-world-heritage-list-10376266.html राजस्थान के छह किले एक साथ विश्व धरोहर की सूची में] - [[दैनिक जागरण|जागरण]] समाचार | अभिगमन तिथि: १२ मार्च २०१८</ref><ref>{{cite news|last1=सिंह|first1=महिम प्रताप|title=यूनेस्को ने राजस्थान के ६ दुर्गों को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया [Unesco declares 6 Rajasthan forts World Heritage Sites]|url=http://www.thehindu.com/news/national/other-states/unesco-declares-6-rajasthan-forts-world-heritage-sites/article4838107.ece|accessdate=१ अप्रैल २०१५|publisher=[[द हिन्दू]] |language=अंग्रेज़ी |date=२२ जून २०१३}}</ref>
वर्ष २०११-१३ की अवधि में स्मारक एवं दुर्गों तथा किलों पर कार्यरत अंतरराष्ट्रीय परिषद (''इन्टरनेश्नल काउन्सिल ऑन मॉन्युमेण्ट्स एण्ड फ़ोर्ट्स'', ICOMOS) ने कई अभियानों के अन्तर्गत इन दुर्गों का निरीक्षण किया एवं इनके नामांकन से सम्बन्धित कई अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ विचार विमर्श किये। अंतरराष्ट्रीय परिषद की रिपोर्ट में इन दुर्गों की इस श्रृंखला का सार्वभौमिक महत्व अतुलनीय बताया गया है। राजस्थान राज्य के इन ६ विशालकाय और वैभवशाली पहाड़ी किलों के रूप में ८वीं से १८वीं शताब्दी की राजपूत रियासतों (राजपूताना शैली के वास्तुशिल्प) की झलक मिलती है - ऐसा इस रिपोर्ट में बताया गया है। वर्ष २०१० में जंतर-मंतर को भी विश्व विरासत की सूची में शामिल किया गया था।<ref>
{{cite web |url=http://www.khaskhabar.com/hindi-news/National-rajasthan-news-select-6-forts-of-rajasthan-in-the-world-heritage-2256093.html