"लक्षण" के अवतरणों में अंतर

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[[सामुद्रिक]] के अनुसार शरीर के अँगों में मिलने वाले कुछ विशेष चिह्न भी लक्षण कहे जाते हैं जो शुभ या अशुभ माने जाते हैं। जैसे,—चक्रवर्ती और बुद्ध के लक्षण एक से होते हैं। लक्षणों को जाननेवाला या शुभ अशुभ चिह्नों का ज्ञाता '''लक्षणज्ञ''' कहलाता है।
 
[[काव्य]] या [[साहित्य]] के लक्षणों का विवेचन करनेवाला ग्रंथ '''लक्षण ग्रंथ''' कहलाता है। दूसरे शब्दों में, लक्षण ग्रन्थ का अर्थ साहित्यिक समीक्षा की पुस्तक या 'समालोचना शास्त्र' है।लक्षण वयवहार के विशिष्ट गुण हैं- जैसे कुंठा के प्रति प्रतिक्रियाएं, समस्याओं का समाधान करने की प्रणालियाँ, आक्रामक तथा प्रतिरक्षक व्यवहार और दूसरों की उपस्थिति में व्यक्ति का बहिर्मुखी या अंतर्मुखी वयवहार आदि।लक्षण स्वप्रत्यय से अधिक् प्रभावित रहते हैं तथा विकास क्रम में स्व प्रत्यय के साथ संकलित हो जाते हैं।आदि।
 
==विभिन्न वस्तुओं के लक्षण==