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== रामचरितमानस की प्रामाणिक प्रति ==
[[चित्र:JagadguruRamabhadracharya008.jpg|thumb|right|जगद्गुरु रामभद्राचार्य अपने द्वारा सम्पादित रामचरितमानस की प्रामाणिक प्रति (भावार्थबोधिनी टीका सहित) भारत की राष्ट्रपत्नीराष्ट्रपति [[प्रतिभा पाटिल]] को अर्पित करते हुए]]
गोस्वामी तुलसीदास ने अयुताधिक पदों से युक्त रामचरितमानस की रचना १६वी शताब्दी ई में की थी। ४०० वर्षों में उनकी यह कृति उत्तर भारत में बहुत लोकप्रिय बन गयी और इसे पाश्चात्य [[भारतविद्या|भारतविद्]] बहुशः '''उत्तर भारत की बाईबिल''' कहते हैं।<ref>{{cite book | language=अंग्रेज़ी | last = लौख्टैफेल्ड | first = जेम्स जी | id=ISBN 978-0-8239-3180-4 | title = The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z | language=अंग्रेज़ी | year = २००१ | publisher=रोज़ेन प्रकाशन ग्रुप | pages=पृष्ठ ५५९}}</ref><ref>{{cite book | location=व्हाईटफ़िश, मोंटाना, संयुक्त राज्य अमरीका | last = मैक्फ़ी | first = जे एम | id=ISBN 978-1-4179-1498-2 | title = The Ramayan of Tulsidas or the Bible of Northern India | date = मई २३, २००४ | publisher=केसिंजर पब्लिशिंग एल एल सी | pages=पृष्ठ vii | chapter=Preface | quote=The choice of the subtitle is no exaggeration. The book is indeed the Bible of Northern India | url=http://books.google.com/books?id=AbG4yfdE1b4C&printsec=frontcover&dq=isbn:9781417914982&hl=en&ei=4dADTtKeHqTV0QG9poS4Cw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CCoQ6AEwAA#v=onepage&q&f=false | language=अंग्रेज़ी | <!-- accessdate=June 24, 2011 -->}}</ref> इस काव्य की अनेकों प्रतियाँ मुद्रित हुई हैं, जिनमें श्री वेंकटेश्वर प्रेस (खेमराज श्रीकृष्णदास) और रामेश्वर भट्ट आदि पुरानी प्रतियाँ और [[गीता प्रेस]], [[मोतीलाल बनारसीदास]], कौदोराम, कपूरथला और पटना से मुद्रित नयी प्रतियाँ सम्मिलित हैं।<ref name="toi-fia">{{cite web | language=अंग्रेज़ी | title = Fury in Ayodhya over Ramcharitmanas | url = http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2009-11-01/india/28068936_1_seers-editions-disciples | date =नवम्बर १, २००९ | publisher=दि टाईम्स ऑफ इण्डिया | first=मंजरी; अरोड़ा, वी एन | last=मिश्र | first1=वी एन | last1=अरोड़ा | accessdate=जून २५, २०११}}</ref> मानस पर अनेक टीकाएँ लिखी जा चुकी हैं, जिनमें मानसपीयूष, मानसगूढार्थचन्द्रिका, मानसमयंक, विनायकी, विजया, बालबोधिनी इत्यादि सम्मिलित हैं।<ref name="rcmtp-prologue">रामभद्राचार्य २००६, पृष्ठ १-२७।</ref> बहुत स्थानों पर इन प्रतियों और टीकाओं में छन्दों की संख्या, मूलपाठ, प्रचलित वर्तनियों (यथा [[:en:Anusvara#Anunasika|अनुनासिक]] प्रयोग) और प्रचलित व्याकरण नियमों (यथा विभक्त्यन्त स्वर) में भेद हैं।<ref name="rcmtp-prologue"/> कुछ प्रतियों में एक आठवाँ [[काण्ड]] भी परिशिष्ट के रूप में मिलता है, जैसे कि मोतीलाल बनारसीदास और श्री वेंकटेश्वर प्रेस की प्रतियों में।<ref>प्रसाद १९९९, पृष्ठ ७९५–८५२</ref><ref>{{cite web | title = तुलसीकृत रामायण: पण्डित ज्वालाप्रसाद मिश्र द्वारा हिन्दी में अनूदित (विशिष्ट संस्करण) | url = http://www.khe-shri.com/details.asp?id=1858b&grpno=33&grpname=Ramayana | accessdate = जून ३०, २०११ | publisher=Shri Ventakeshwar Steam Press, Bombay | quote=लवकुशकाण्ड सहित}}</ref>
 
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