"अनुवाद" के अवतरणों में अंतर

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== नाइडा का चिन्तन ==
नाइडा (१९६४) के अनुसार <ref>https://books.google.co.in/books?id=xBpEuN9CsTMC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false</ref> ये अनुवाद पर्याय जिस प्रक्रिया से निर्धारित होते हैं, उसके दो रूप हैं : प्रत्यक्ष और परोक्ष । इन दोनों में आधारभूत अन्तर है । प्रत्यक्ष प्रक्रिया के प्रारूप के अनुसार मूल पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर उपलब्ध भाषिक इकाइयों के लक्ष्यभाषा में अनुवाद पर्याय निश्चित होते हैं; और अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें मूल पाठ के प्रत्येक अंश का अनुवाद होता है । इस प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती स्थिति भी होती है जिसमें एक निर्विशेष और सार्वभौम भाषिक संरचना रहती है; इसका केवल सैद्धान्तिक महत्त्व है । इस प्रारूप की मान्यता के अनुसार, अनुवादक मूलभाषा पाठ के सन्देश को सीधे लक्ष्यभाषा में ले जाता है; वह इन दोनों स्थितियों में मूलभाषा पाठ और लक्ष्यभाषा पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही रहता है । अनुवाद-पर्यायों के चयन और प्रस्तुतीकरण का कार्य एक स्वचालित प्रक्रिया के समान होता है । नाइडा ने एक आरेख के द्वारा इसे स्पष्ट किया है :
<poem>
क ---------------- (क्ष) ---------------- ख
9,894

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