"सिद्धगिरि ग्रामजीवन संग्रहालय": अवतरणों में अंतर

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'''सिद्धगिरि ग्रामजीवन संग्रहालय''' [[महाराष्ट्र]] के [[कोल्हापुर]] जिले में स्थित है। जो कनेरी मठ के नाम से भी लोकप्रिय है। यह एक ऐसा गाँव है जहाँ किसान हल और बैल के साथ खड़े मिलेंगे। गाँव की औरतें कुँए में पानी भरने जाती हुई दिखेंगी। बच्चे पेड़ के नीचे गुरुकुल शैली में पढ़ाई कर रहे हैं, किसान खेत में भोजन कर रहे हैं और आस-पास पशु चारा चर रहे हैं। गाँव के घरों का घर-आँगन और विभिन्न कार्य करते लोग, लेकिन सब कुछ स्थिर ठहरा हुआ फिर भी एकदम सजीव, जीवंत।
 
यह एक ऐसा गाँव है जहाँ किसान हल और बैल के साथ खड़े मिलेंगे। गाँव की औरतें कुंए में पानी भरने जाती हुई दिखेंगी। बच्चे पेड़ के नीचे गुरुकुल शैली में पढ़ाई कर रहे हैं, किसान खेत में भोजन कर रहे हैं और आस-पास पशु चारा चर रहे हैं। गाँव के घरों का घर-आँगन और विभिन्न कार्य करते लोग, लेकिन सब कुछ स्थिर ठहरा हुआ फिर भी एकदम सजीव, जीवंत।
[[File:किसान.jpg|thumb|किसान खेति कर रहे हे]]
 
[[महाराष्ट्र]] में [[कोल्हापुर]] को न सिर्फ दक्षिण की काशी, बल्कि महालक्ष्मी मांमंदिर केभी आवासहै केजो रूपकाफी मेंप्रसिद्ध भीहै। जानासाथ जाता है।ही यहां के प्राचीन मंदिर देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का विषय हैं। कोल्हापुर से केवल दस किलोमीटर की दूरी पर एक छोटा-सा शांत गांव हैहै। -सिद्धगिरि ग्रामजीवन संग्रहालय जिसे '''कनेरी, जहांमठ''' परके बनानाम से भी जाना जाता है जो देश के प्राचीनतम मठों में गिना जाने वाला ‘सिद्धगिरी मठ।’ है.
== परिचय ==
[[महाराष्ट्र]] में [[कोल्हापुर]] को न सिर्फ दक्षिण की काशी, बल्कि महालक्ष्मी मां के आवास के रूप में भी जाना जाता है। यहां के प्राचीन मंदिर देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का विषय हैं। कोल्हापुर से केवल दस किलोमीटर की दूरी पर एक छोटा-सा शांत गांव है - कनेरी, जहां पर बना है देश के प्राचीनतम मठों में गिना जाने वाला ‘सिद्धगिरी मठ।’
 
सिद्धगिरी मठ के 27वें मठाधिपति श्री काड़सिद्धेश्वर महाराज के शुभ हाथों से ‘श्री सिद्धगिरी म्यूजियमसंग्रहालय की नींव रखी गई। जुलाई 2007२००७ में इसका उद्घाटन हुआ।किया गया था। आठ एकड़ के खुले क्षेत्र में फैली यह जगह गांव की दुनिया की झलक दिखलाती है। आज पूरे देश में अपने आप में इकलौता और अनूठा म्यूजियमसंग्रहालय कहलाता है ये सिद्धगिरी म्यूजियम।है। यहाँ ग्रामीण जिंदगी की छवियों को मूतिर्यो में समेटने की कोशिश की गई है। इस संग्रहालय की स्थापना लन्दन[[लंदन]] के [[मैडम तुसॉदतुसाद]] मोम संग्रहालय से प्रेरित होकर की गई है।
 
संग्रहालय की स्थापना करने वाले सिद्धगिरि गुरुकुल के प्रमुख काड़सिद्धेश्वर स्वामी का कहना है कि, "यूं तो हमने इसकी प्रेरणा मैडम तुसॉद संग्रहालय से ली है, पर यह संग्रहालय महात्मा गांधी की विचारधारा से प्रभावित है।के अनुसार-
गांधी जी हर गांव को आत्मनिर्भर देखना चाहते थे। वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अहम स्थान दिलाना चाहते थे। यह संग्रहालय भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्ता को दर्शाता है।"
 
{{cquote|...यूं तो हमने इसकी प्रेरणा मैडम तुसाद संग्रहालय से ली है, पर यह संग्रहालय [[महात्मा गांधी]] की विचारधारा से प्रभावित है। गांधी जी हर गांव को आत्मनिर्भर देखना चाहते थे। वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अहम स्थान दिलाना चाहते थे। यह संग्रहालय भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्ता को दर्शाता है।"}}
संग्रहालय में कई प्राचीन संतों की मूर्तियां हैं। उदाहरण के लिए एक पेड़ के नीचे महर्षि पातंजलि को प्राचीन शैली में कक्षा लेते दिखाया गया है। कुछ ही मीटर की दूरी पर महर्षि कश्यप को एक रोगी का इलाज करते दिखाया गया है।
यहां महर्षि कणाद को वैज्ञानिक शोध में लीन देखा जा सकता है, वहीं महर्षि वराहमिहिर ग्रह-नक्षत्रों की दुनिया से अपने शिष्यों को अवगत कराते नजर आते हैं।
ईंट, पत्थरों से निर्मित इस संग्रहालय में प्रतिमाओं का निर्माण सीमेंट से किया गया है। इसके लिए करीब 80 कुशल मूर्तिकारों की सेवा ली गई।
 
इस संग्रहालय में कई प्राचीन संतों की मूर्तियां हैं। उदाहरण के लिए एक पेड़ के नीचे महर्षि पातंजलिपतंजलि को प्राचीन शैली में कक्षा लेते दिखाया गया है। कुछ ही मीटर की दूरी पर महर्षि कश्यप को एक रोगी का इलाज करते दिखाया गया है। यहां महर्षि [[कणाद]] को वैज्ञानिक शोध में लीन देखा जा सकता है, वहीं महर्षि [[वराह मिहिर]] ग्रह-नक्षत्रों की दुनिया से अपने शिष्यों को अवगत कराते नजर आते हैं। ईंट, पत्थरों से निर्मित इस संग्रहालय में प्रतिमाओं का निर्माण सीमेंट से किया गया है। इसके लिए करीब ८० कुशल मूर्तिकारों की सेवा ली गई।
इसके प्रबंधक इसे खुला प्रदर्शन परिसर कहना पसंद करते हैं, जहां की मूर्तियां बारिश, गर्मी आदि को झेलने के बावजूद अपनी चमक बनाए हुई हैं।
 
==सन्दर्भ==
== बाहरी कड़ियाँ==
{{टिप्पणीसूची}}
*[http://www.bhartiyapaksha.com/?p=12032 समाज की साधना को समर्पित एक मठ] (भारतीय पक्ष)
*[http://www.bhartiyapaksha.com/?p=12018 कोल्हापुर में होगा चौथा भारत विकास संगम] (भारतीय पक्ष)
 
[[श्रेणी:महाराष्ट्र]]
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