"नैतिक शिक्षा": अवतरणों में अंतर

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व्यक्ति के निर्माण और समाज के उत्थान में [[शिक्षा]] का अत्यधिक महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। प्राचीन काल की भारतीय गरिमा ऋषियों द्वारा संचालित [[गुरुकुल पद्धति]] के कारण ही ऊँची उठ सकी थी। पिछले दिनों भी जिन देशों ने अपना भला-बुरा निर्माण किया है, उसमें शिक्षा को ही प्रधान साधन बनाया है। जर्मनी इटली का नाजीवाद, रूस और चीन का साम्यवाद, जापान का उद्योगवाद युगोस्लाविया, स्विटजरलैंड, क्यूबा आदि ने अपना विशेष निर्माण इसी शताब्दी में किया है। यह सब वहाँ की शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने से ही संभव हुआ। व्यक्ति का बौद्धिक और चारित्रिक निर्माण बहुत सीमा तक उपलब्ध शिक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है।
 
[[श्रेणी:शिक्षा]]
[[श्रेणी:शिक्षा]] शिक्षा एवं धर्म स्वाभाविक संबंध मन जाता है।दोनों के लक्ष्य समान है।दोनों का संबंध व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास से है। दोनों व्यक्ति को उसके वातावरण के संपर्क से ही नही वरन उसकी उनकी दासता से भी मुक्ति दिलाने का प्रयास करते है। यह स्वीकार किया जाता है कि व्यक्ति की नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति करना है