"अमोघवर्ष नृपतुंग" के अवतरणों में अंतर

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{{Infobox royalty
| image = Old Kannada inscription (876 AD) of Rashtrakuta King Amoghavarsha I at Veerabhadra temple in Kumsi.jpg
| alt = अमोघवर्ष
| caption = राष्ट्रकूट नरेश अमोघवर्ष का शिलालेख जो ८७६ ई में पुरानी कन्नड भाषा में लिखा गया है। (कुम्सी के वीरभद्र मन्दिर में)
| succession = ६ठा [[राष्ट्रकूट साम्राज्य|राष्ट्रकूट सम्राट]]
| reign = {{circa|815|877 CE}} (64 वर्ष)
| predecessor = [[गोविन्द तृतीय]]
| successor = [[कृष्ण द्वितीय]]
| birth_name = शर्व
| birth_date = 800 ई
| death_date = 878 ई
| father = [[गोविन्द तृतीय]]
| religion = [[Jainism]]{{sfn|Jaini|2000|p=339}}
| teachers = [[जिनसेन]]
}}
[[चित्र:Jain Narayana temple at Pattadakal.JPG|right|thumb|300px|पट्टडकल का जैन नारायण मंदिर अमोघवर्ष नृपतुंग ने निर्मित कराया था।]]
'''अमोघवर्ष नृपतुंग''' या '''अमोघवर्ष प्रथम''' (800 –- 878) [[भारत]] के [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूट वंश]] के महानतम शाशक थे। वे [[जैन धर्म]] के अनुयायी थे। इतिहासकारों ने उनकी शांतिप्रियता एवं उदारवादी धार्मिक दृष्टिकोण के लिये उन्हें [[सम्राट अशोक]] से तुलना की है। उनके शासनकाल में कई [[संस्कृत]] एवं [[कन्नड]] के विद्वानो को प्रश्रय मिला जिनमें महान गणितज्ञ [[महावीराचार्य]] का नाम प्रमुख है।
 
== परिचय ==
 
अमोघवर्ष के संजन [[ताम्रपत्र]] के अभिलेख से समकालीन भारतीय राजनीति पर पर्याप्त प्रकाश पड़ता है, यद्यपि उसमें स्वयं उसकी विजयों का वर्णन अतिरंजित है। वास्तव में उसके युद्ध प्राय: उसके विपरीत ही गए थे। अमोघवर्ष धार्मिक और विद्याव्यसनी था, महालक्ष्मी का परम भक्त। जैनाचार्य के उपदेश से उसकी प्रवृत्ति जैन हो गई थी। '[[कविराजमार्ग]]' और '[[प्रश्नोत्तरमालिका]]' का वह रचयिता माना जाता है। उसी ने [[मान्यखेट]] राजधानी बनाई थी। अपने अंतिम दिनों में राजकार्य मंत्रियों और युवराज पर छोड़ वह विरक्त रहने लगा था।
 
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
 
== बाहरी कड़ियाँ ==