"जयप्रकाश नारायण" के अवतरणों में अंतर

436 बैट्स् नीकाले गए ,  1 वर्ष पहले
छो
Briguchetra (Talk) के संपादनों को हटाकर 2405:204:94AE:3966:0:0:2B39:E8A4 के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
छो (Briguchetra (Talk) के संपादनों को हटाकर 2405:204:94AE:3966:0:0:2B39:E8A4 के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया)
टैग: प्रत्यापन्न
| caption = जयप्रकाश नारायण (डॉ॰ लक्ष्मीनारायण लाल द्वारा लिखी गई किताब के मुखपृष्ठ से)
| birth_date = {{birth date|1902|10|11|mf=y}}
| birth_place= [[सिताब दियारा]], [[बलिया]]सारण, [[उत्तर प्रदेशबिहार]], [[भारत]]
| death_date = {{death date and age|1979|10|8|1902|10|11|mf=y}}
}}
 
== जीवन ==
उनका विवाह [[बिहार]] के प्रसिद्ध गांधीवादी [[बृज किशोर प्रसाद]] की पुत्री प्रभावती के साथ अक्टूबर 1920 में हुआ। प्रभावती विवाह के उपरान्त [[कस्तूरबा गांधी]] के साथ गांधी आश्रम में रहीं। वे डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद और सुप्रसिद्ध गांधीवादी डॉ॰ अनुग्रह नारायण सिन्हा द्वारा स्थापित [[बिहार विद्यापीठ]] में शामिल हो गये। १९२९ में जब वे अमेरिका से लौटे, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तेज़ी पर था। उनका सम्पर्क गांधी जी के साथ काम कर रहे [[जवाहर लाल नेहरु]] से हुआ। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने। [[1932]] में गांधी, नेहरु और अन्य महत्त्वपूर्ण कांग्रेसी नेताओं के जेल जाने के बाद, उन्होंने भारत में अलग-अलग हिस्सों में संग्राम का नेतृत्व किया। अन्ततः उन्हें भी [[मद्रास]] में सितम्बर 1932 में गिरफ्तार कर लिया गया और [[नासिक]] के जेल में भेज दिया गया। यहाँ उनकी मुलाकात [[मीनू मसानी]], [[अच्युत पटवर्धन]], [[एन. सी. गोरे|एन॰ सी॰ गोरे]], [[अशोक मेहता]], [[एम. एच. दांतवाला|एम॰ एच॰ दाँतवाला]], [[चार्ल्स मास्कारेन्हास]] और [[सी. के. नारायणस्वामी|सी॰ के॰ नारायण स्वामी]] जैसे उत्साही कांग्रेसी नेताओं से हुई। जेल में इनके द्वारा की गयी चर्चाओं ने [[कांग्रेस सोसलिस्ट पार्टी]] (सी॰ एस॰ पी॰) को जन्म दिया। सी॰ एस॰ पी॰ समाजवाद में विश्वास रखती थी। जब कांग्रेस ने 1934 में चुनाव में हिस्सा लेने का फैसला किया तो जे॰ पी॰ और सी॰ एस॰ पी॰ ने इसका विरोध किया। जयप्रकाश जी ने देश की आजादी मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, 1932 और 1942 में गाँधी तथा नेहरू के जेल जाने के उपरांत उन्होंने ही भारत छोडो आन्दोलन का सफल नेतृत्व किया।
 
1939 में उन्होंने [[द्वितीय विश्वयुद्ध]] के दौरान, अंग्रेज सरकार के खिलाफ लोक आन्दोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने सरकार को किराया और राजस्व रोकने के अभियान चलाये। [[टाटा स्टील कंपनी|टाटा स्टील कम्पनी]] में हड़ताल कराके यह प्रयास किया कि अंग्रेज़ों को इस्पात न पहुँचे। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 9 महीने की कैद की सज़ा सुनाई गयी। जेल से छूटने के बाद उन्होंने गांधी और सुभाष चंद्र बोस के बीच सुलह का प्रयास किया। उन्हें बन्दी बनाकर मुम्बई की आर्थर जेल और दिल्ली की कैम्प जेल में रखा गया। 1942 भारत छोडो आन्दोलन के दौरान वे आर्थर जेल से फरार हो गये।