"मीर उस्मान अली ख़ान" के अवतरणों में अंतर

मीर उस्मान अली खान ने 24 फरवरी 1967 को [[किंग कोठी पैलेस]] में अपनी आखिरी सांस ली। उन्हें [[जूदी मस्जिद]] में दफनाया गया, जिसे उन्होंने 1936 में अपने बेटे जवाड़ की याद में बनाया था, जो एक शिशु के रूप में मर गए थे।
 
अगले दिन, मक्का मस्जिद ([[चारमीनार]] के पास) से लेकर [[किंग कोटी]](मस्जिद-ए-जुडी) के बीच पांच किलोमीटर लंबी खिंचाव थी, जो लोगों के साथ जाम-पैक था। राज्य के विभिन्न हिस्सों के सभी धर्म के लाखों लोगों ने ट्रेनों, बसों और बैल गाड़ियां हैदराबाद में महल परिसर में एक बर्फ बॉक्स में रखे अपने राजा के प्राणघातक अवशेषों की आखिरी झलक देखने के लिए हैदराबाद शहर में प्रवेश किया। भीड़ इतनी अनियंत्रित थी कि लोगों को कतार में स्थानांतरित करने में सक्षम बनाने के लिए साइड रोड के साथ बार्केड को स्थापित किया जाना था।
उनका अंतिम संस्कार का जुलूस भारतीय इतिहास में सबसे बड़ा था, उनकी लोकप्रियता की गवाही यह थी कि अनुमानित ''10 लाख लोग'' निज़ाम बंदूक-गाड़ी जुलूस का हिस्सा बने। निजाम का अंतिम संस्कार भारत के इतिहास में लोगों की सबसे बड़ी गैर-धार्मिक, गैर-राजनीतिक सभा थी।<ref>http://www.thehansindia.com/posts/index/Hyderabad-Tab/2017-02-25/Nizams-opulance-has-no-takers/283066</ref><ref>{{cite news|title=Nizam of Hyderabad’s work to go on Facebook|url=https://www.deccanchronicle.com/lifestyle/books-and-art/200217/nizam-of-hyderabads-work-go-on-facebook.html |accessdate=12 सितम्बर 2018}}</ref>
 
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