"श्लेष अलंकार" के अवतरणों में अंतर

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'''चरण धरत चिंता करत, चितवत चारहु ओर|
'''सुबरन को खोजत फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर||'''
 
यहाँ सुबरन का प्रयोग एक बार किया गया है, किन्तु पंक्ति में प्रयुक्त '''सुबरन''' शब्द के तीन अर्थ हैं -
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