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==साहित्य==
उर्दू में साहित्य का प्रांगण विशाल है। [[अमीर खुसरो]] उर्दू के आद्यकाल के कवियों में एक हैं। उर्दू-साहित्य के इतिहासकार [[वली मुहम्मद वली|वली औरंगाबादी]] (रचनाकाल 1700 ई. के बाद) के द्वारा उर्दू साहित्य में क्रान्तिकारक रचनाओं का आरंभ हुआ। शाहजहाँ ने अपनी राजधानी, आगरा के स्थान पर, [[दिल्ली]] बनाई और अपने नाम पर सन् 1648 ई. में 'शाहजहाँनाबाद' वसाया, लालकिला बनाया। ऐसा प्रतीत होता है कि इसके पश्चात राजदरबारों में [[फ़ारसी]] के साथ-साथ 'जबानेज़बान-ए-उर्दू-ए-मुअल्ला' में भी रचनाएँ तीव्र होने लगीं। यह प्रमाण मिलता है कि शाहजहाँ के समय में [[पंडित चन्द्रभान बिरहमन]] ने बाज़ारों में बोली जाने वाली इस जनभाषा को आधार बनाकर रचनाएँ कीं। ये फ़ारसी लिपि जानते थे। अपनी रचनाओं को इन्होंने फ़ारसी लिपि में लिखा। धीरे-धीरे दिल्ली के शाहजहाँनाबाद की उर्दू-ए-मुअल्ला का महत्त्व बढ़ने लगा।
 
उर्दू के कवि [[मीर तकीतक़ी "मीर"|मीर]] साहब (1712-181. ई.) ने एक जगह लिखा है-
 
:''दर फ़ने रेख़ता कि शेरस्त बतौर शेर फ़ारसी ब ज़बाने'' <br>
:''उर्दू-ए-मोअल्ला शाहजहाँनाबाद देहली।''
 
भाषा तथा लिपि का भेद रहा है क्योंकि राज्यसभाओं की भाषा फ़ारसी थी तथा लिपि भी फ़ारसी थी। उन्होंने अपनी रचनाओं को जनता तक पहुँचाने के लिए भाषा तो जनता की अपना ली, लेकिन उन्हें फ़ारसी लिपि में लिखते रहे।