"पृथ्वीराज चौहान" के अवतरणों में अंतर

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उसके पश्चात् अनेक लघु और मध्यम युद्ध पृथ्वीराज के और घोरी के मध्य हुए।विभिन्न ग्रन्थों में जो युद्ध सङ्ख्याएं मिलती है, वे सङ्ख्या ७, १७, २१ और २८ हैं। सभी युद्धों में पृथ्वीराज ने घोरी को बन्दी बनाया और उसको छोड़ दिया। परन्तु अन्तिम बार नरायन के द्वितीय युद्ध में पृथ्वीराज की पराजय के पश्चात् घोरी ने पृथ्वीराज को बन्दी बनाया और कुछ दिनों तक '[[इस्लाम|इस्लाम्]]'-धर्म का अङ्गीकार करवाने का प्रयास करता रहा। उस प्रयोस में पृथ्वीराज को शारीरक पीडाएँ दी गई। शरीरिक यातना देने के समय घोरी ने पृथ्वीराज को अन्धा कर दिया। अन्ध पृथ्वीराज ने
अपने मित्र चंदरबरदई के साथ मिलकर गोरी के वध की योजना बनाई,योजना के तहत हिन्दू हृदय सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने शब्दभेदी विद्या से तीर छोड़कर मोहम्मद गोरी की हत्या कर दी । <poem>{{cquote|एक एव सुहृद्धर्मो निधनेऽप्यनुयाति यः।
शरीरेण समं नाशं सर्वम् अन्यद्धि गच्छति॥ ८.१७॥ [[मनुस्मृतिः]] }}</poem>
 
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