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नीबू में ए, बी और सी विटामिनों की भरपूर मात्रा है-विटामिन ए अगर एक भाग है तो विटामिन बी दो भाग और विटामिन सी तीन भाग।
इसमें -[[पोटेशियम]], [[लोहा]], [[सोडियम]], [[मैगनेशियम]], [[तांबा]], [[फास्फोरस]] और [[क्लोरीन]] [[तत्त्व]] तो हैं ही, [[प्रोटीन]], [[वसा]] और कार्बोज भी पर्याप्त मात्रा में हैं।<ref>{{cite web |url= http://pustak.org/bs/home.php?bookid=3483|title=प्रकृति द्वारा स्वास्थ्य नीबू और आँवला
|accessmonthdayaccess-date=[[४ मई]]|accessyear= [[२००९]]|format=पीएचपी|publisher=भारतीय साहित्य संग्रह|language=}}</ref> विटामिन सी से भरपूर नीबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही एंटी आक्सीडेंट का काम भी करता है और कोलेस्ट्राल भी कम करता है। नीबू में मौजूद विटामिन सी और पोटेशियम घुलनशील होते हैं, जिसके कारण ज्यादा मात्रा में इसका सेवन भी नुकसानदायक नहीं होता। [[रक्ताल्पता]] से पीडि़त मरीजों को भी नीबू के रस के सेवन से फायदा होता है। यही नहीं, नीबू का सेवन करने वाले लोग जुकाम से भी दूर रहते हैं। एक नीबू दिन भर की विटामिन सी की जरूरत पूरी कर देता है। नीबू के कुछ घरेलू प्रयोगों पर लगभग हर भारतीय का विश्वास हैं। ऐसा माना जाता है कि दिन भर तरोताजा रहने और स्फूर्ति बनाए रखने के लिए एक गिलास गुनगुने [[पानी]] में एक नीबू का रस व एक चम्मच [[शहद]] मिलाकर पीना चाहिए। एक बाल्टी पानी में एक नीबू के रस को मिलाकर गर्मियों में नहाने से दिनभर ताजगी बनी रहती है। गर्मी के मौसम में [[हैजा|हैजे]] से बचने के लिए नीबू को [[प्याज]] व [[पुदीना|पुदीने]] के साथ मिलाकर सेवन करना चाहिए। [[लू]] से बचाव के लिए नीबू को [[काला नमक|काले नमक]] वाले पानी में मिलाकर पीने से दोपहर में बाहर रहने पर भी लू नहीं लगती। इसके अलावा इसमें विटामिन ए, [[सेलेनियम]] और [[जिंक]] भी होता है। गले में [[मछली]] का कांटा फंस जाए तो नीबू के रस को पीने से निकल जाता है।<ref>{{cite web |url=http://in.jagran.yahoo.com/sakhi/?page=article&articleid=3698&edition=200707&category=4|title=नीबू एक फ़ायदे अनेक|accessmonthdayaccess-date=[[४ मई]]|accessyear= [[२००९]]|format=|publisher=जागरण|language=}}</ref>
 
== खेती ==
विश्व में सबसे अधिक नीबू का उत्पादन [[भारत]] में होता है। यह विश्व के कुल नीबू उत्पादन का १६ प्रतिशत भाग उत्पन्न करता है। [[मैक्सिको]], [[अर्जन्टीना]], [[ब्राजील]] एवं [[स्पेन]] अन्य मुख्य उत्पादक देश हैं। दाहिनी ओर विश्व के दस शीर्ष नीबू उत्पादक देशों की सूची है (२००७ के अनुसार)। नीबू, लगभग सभी प्रकार की भूमियों में सफलतापूर्वक उत्पादन देता है परन्तु जीवांश पदार्थ की अधिकता वाली, उत्तम जल निकास युक्त दोमट भूमि, जिसकी गहराई २-२.५ मी.या अधिक हो, आदर्श मानी जाती है। भूमि का पी-एच ६.५-७.० होने से सर्वोत्तम वृद्धि और उपज मिलती है।<ref>[http://www.beautyepic.com/lemon-water-benefits/ हर दिन नीबू से उपयोग]</ref>
 
इसकी कुछ प्रमुख किस्में हैं [[नीबू की किस्में|कागजी नीबू]], [[नीबू की किस्में|प्रमालिनी]], [[नीबू की किस्में|विक्रम]], [[नीबू की किस्में|चक्रधर]], [[नीबू की किस्में|पी के एम-१]] (P K M-1) और [[नीबू की किस्में|साईं शर्बती]]। इनमें से कागजी नीबू सर्वाधिक महत्वपूर्ण किस्म है। इसकी व्यापक लोकप्रियता के कारण इसे खट्टा नीबू का पर्याय माना जाता है। प्रमालिनी किस्म गुच्छे में फलती है, जिसमें ३ से ७ तक फल होते हैं। यह कागजी नीबू की तुलना में ३० प्रतिशत अधिक उपज देती है। इसके फल में ५७ प्रतिशत (कागजी नीबू में ५२ प्रतिशत) रस पाया जाता है। विक्रम नामक किस्म भी गुच्छों में फलन करती है। एक गुच्छे में ५-१० तक फल आते हैं। कभी-कभी [[मई]]-[[जून]] तथा [[दिसंबर|दिसम्बर]] में बेमौसमी फल भी आते हैं। कागजी नीबू की अपेक्षा यह ३०-३२ प्रतिशत अधिक उत्पादन देती है। चक्रधर नामक किस्म खट्टा नीबू की बीज रहित किस्म है जो [[रोपण]] के चौथे वर्ष से फल देना प्रारम्भ कर देती है। इसमें ६०-६६ प्रतिशत [[रस (वनस्पति)|रस]] पाया जाता है। इसके फल प्राय:[[जनवरी]] - [[फरवरी]], जून-[[जुलाई]] तथा [[सितम्बर]]-[[अक्टूबर]] में मिलते हैं। पी के एम-१ नामक किस्म उच्च उत्पादन देने वाली किस्म है, जिसके फल गोल, मध्यम से लेकर बड़े आकार के होते हैं। पीले रंग के फलों में लगभग ५२ प्रतिशत तक रस मिलता है। साई शरबती उच्च उत्पादन क्षमता वाली किस्म है। इसमें ग्रीष्म फलन की प्रवृत्ति पाई जाती है। बीजरहित (सीडलेस) नीबू- यह एक नया चयन है जो अन्य किस्मों से दोगुना उत्पादन देता है। यह एक पछैती किस्म है जिसके फल हल्के गुलाबी रंग वाले और पतले छिलके वाले होते हैं। इसके अतिरिक्त ताहिती या पर्शियन वर्ग के नीबू [[गुणसूत्र]] त्रिगुणित होते हैं। फल आकार में बड़े व बीजरहित होते हैं। [[असम]] के कुछ क्षेत्रों में [[नीबू की किस्में|अभयपुरी लाइम]] तथा [[नीबू की किस्में|करीमगंज लाइम]] भी उगाये जाते हैं।<ref>{{cite web |url= http://opaals.iitk.ac.in/deal/embed.jsp?url=crops-type.jsp&url2=94&url3=&url4=%E0%A4%AB%E0%A4%B2&url5=%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A5%82&url6=HI|title=फल नीबू|accessmonthdayaccess-date=[[९ मार्च]]|accessyear= [[२००९]]|format=जेएसपी|publisher=डील|language=}}</ref>
 
पुराने समय से ही नीबू एक गर्भ निरोधक के रूप में इस्तेमाल होता रहा है, पर आधुनिक युग में इसके इस गुण की ओर लोगों ने ध्यान कम ही दिया है। ऑस्ट्रेलिया के कुछ वैज्ञानिकों ने अपने एक शोध के दौरान पाया है कि नीबू का रस मानव [[शुक्राणु]] को मारने में सक्षम है, साथ ही यह एच आई वी विषाणु को भी मार देता है।<ref>[http://www.bbc.co.uk/hindi/news/021011_lemon_ac.shtml नीबू परिवार नियोजन में सहायक=]</ref>
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