"पुष्पक विमान" के अवतरणों में अंतर

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{{Infobox mythical creature
|name = पुष्पक विमान
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|Image_Name = Pushpakviman.jpg
|image_size = 300
|Image_Caption = श्रीराम, सीता एवं अन्य सहित पुष्पक विमान पर आरूढ
|Mythology = [[रामायण]]
|Grouping = प्राचीन हिन्दू पौराणिक वाहन
|Sub_Grouping = आकाशीय वाहन
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|Country = [[श्रीलंका]], [[भारत]]
|Region = [[भारतीय उपमहाद्वीप]]
|Habitat =
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'''पुष्पकविमान''' [[हिन्दू]] [[पुराण| पौराणिक]] महाकाव्य [[रामायण]] में वर्णित वायु-वाहन था। इसमें [[लंका]] का राजा [[रावण]] आवागमन किया करता था। इसी विमान का उल्लेख सीता हरण प्रकरण में भी मिलता है। रामायण के अनुसार राम-रावण युद्ध के बाद [[श्रीराम]], [[सीता]], [[लक्ष्मण]] तथा लंका के नवघोषित राजा [[विभीषण]] तथा अन्य बहुत लोगों सहित लंका से [[अयोध्या]] आये थे। यह विमान मूलतः धन के देवता, [[कुबेर]] के पास हुआ करता था, किन्तु रावण ने अपने इस छोटे भ्राता कुबेर से बलपूर्वक उसकी नगरी सुवर्णमण्डित लंकापुरी तथा इसे छीन लिया था।<ref name="जगत">{{cite web |url=http://www.samacharjagat.com/news/auto/pushpaka-vimana-of-ravana-86407
|title= जानिए रावण के रहस्य उसकी लंका में थे छह एयरपोर्ट
|accessmonthdayaccess-date= |accessdate= |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= ९ सितंबर, २०१६|year= |month= |format= |work= |publisher= समाचार जगत|pages= |language= |archiveurl= |archivedate= |quote= }} </ref><ref name="अवश्य">{{cite web |url=http://hindi.webdunia.com/dussehra-special/ravana-116100500048_3.html
|title= रावण की 10 खास बातें जो आपको जानना चाहिए, अवश्य पढ़ें....|accessmonthdayaccess-date= |accessdate= |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format= |work= [[दैनिक जागरण]] |publisher= वेब दुनिया |pages= |language=|archiveurl= |archivedate= |quote= }}</ref> अन्य ग्रन्थों में उल्लेख अनुसार पुष्पक विमान का प्रारुप एवं निर्माण विधि [[अंगिरा ऋषि]] द्वारा<ref name="अवश्य"/> एवं इसका निर्माण एवं साज-सज्जा देव-शिल्पी [[विश्वकर्मा]] द्वारा की गयी थी। भारत के प्राचीन हिन्दू ग्रन्थों में लगभग दस हजार वर्ष पूर्व विमानों एवं युद्धों में तथा उनके प्रयोग का विस्तृत वर्णन दिया है। इसमें बहुतायत में रावन के पुष्पक विमान का उल्लेख मिलता है। इसके अलावा अन्य सैनिक क्षमताओं वाले विमानों, उनके प्रयोग, विमानों की आपस में भिडंत, अदृश्य होना और पीछा करना, ऐसा उल्लेख मिलता है। यहां प्राचीन विमानों की मुख्यतः दो श्रेणियाँ बताई गई हैं- प्रथम मानव निर्मित विमान, जो आधुनिक विमानों की भांति ही पंखों के सहायता से उडान भरते थे, एवं द्वितीय आश्चर्य जनक विमान, जो मानव द्वारा निर्मित नहीं थे किन्तु उन का आकार प्रकार आधुनिक उडन तशतरियों के अनुरूप हुआ करता था।<ref name="ट्री"> {{cite web |url=http://hindi.speakingtree.in/allslides/content-244055
|title= रावण के पास सच में था पुष्पक-विमान!
|accessmonthdayaccess-date= |accessdate= |last=शर्मा |first= ऋचा |authorlink= |coauthors= |date= ११ नवंबर, २०१३|year= |month= |format=
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{{TOC}}
 
इस विमान में बहुत सी विशेषताएं थीं, जैसे इसका आकार आवश्यकतानुसार छोटा या बड़ा किया जा सकता था। कहीं भी आवागमन हेतु इसे अपने मन की गति से असीमित चलाया जा सकता था। यह नभचर वाहन होने के साथ ही भूमि पर भी चल सकता था। इस विमान में स्वामी की इच्छानुसार गति के साथ ही बड़ी संख्या में लोगों के सवार होने की क्षमता भी थी।<ref name="अवश्य"/> यह विमान यात्रियों की संख्या और वायु के घनत्व के हिसाब से स्वयमेव अपना आकार छोटा या बड़ा कर सकता था।<ref name="ज्ञान">{{cite web |url=http://www.gyanpanti.com/secrets-of-pushpak-vimana-in-hindi/
|title= पुष्पक विमान के अदभुत रहस्य
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क्योंकि विमान गगन में अपने स्वामी की इच्छा के अनुसार भ्रमण करने में सक्षम था, अतः इसे इसके स्वामी कुबेर द्वार देवताओं को यात्रा कर के लिये भी दिया जाता था। एक बार रावण ने कुबेर से उसकी नगरी लंकापुरी एवं यह यह विमान बलपूर्वक छीन लिया था, तभी कुबेर ने वर्तमान [[तिब्बत]] के निकट नयी नगरी [[अलकापुरी]]<ref>[https://books.google.co.in/books?id=f4pUBQAAQBAJ&pg=PA102&lpg=PA102&dq=%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82&source=bl&ots=Fw5RYsnMpx&sig=ij1jjHJQ-WiBInjjGGCYRPQyd2U&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjkvdaq4f3SAhVIz1QKHYiVAOgQ6AEIHjAB#v=onepage&q=%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%80%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82&f=false] पुस्तक - विक्रमशिला का इतिहास </ref> का निर्माण करवाया। रावण के वध उपरान्त भगवान राम ने इसे लेकर एकल प्रयोग उपरान्त इसके मूल स्वामी कुबेर को लौटा दिया था। इस एकल प्रयोग को विभीषण के बहुत निवेदन पर राम ने सब लोगों के लंका से अयोध्या वापसी हेतु प्रयोग किया था।<ref name="ज्ञान"/><ref name="उजाला"> {{cite web |url= http://www.amarujala.com/spirituality/religion/ramleela-puspak-viman-airport-of-ravan |title=अच्छा तो यहां रखता था रावण अपना पुष्पक विमान |accessmonthdayaccess-date= |accessdate= |last= |first=टीम डिजिटल |authorlink= |coauthors= |date= ११ अक्तूबर, २०१३|year= |month= |format= |work= |publisher= |pages= |language= |archiveurl= |archivedate= |quote= }} </ref>
 
वर्त्तमान श्रीलंका की श्री रामायण रिसर्च समित्ति के अनुसार रावण के पास अपने पुष्पक विमान को रखने के लिए चार विमानक्षेत्र थे। इन चार विमानक्षेत्रों में से एक का नाम उसानगोड़ा था। इस हवाई अड्डे को हनुमान जी ने लंका दहन के समय जलाकर नष्ट कर दिया था।<ref name="अवश्य"/> अन्य तीन हवाई अड्डे गुरूलोपोथा, तोतूपोलाकंदा और वारियापोला थे जो सुरक्षित बच गए।<ref name="उजाला"/><ref name="भास्कर">{{cite web |url=http://www.bhaskar.com/news/PUN-JAL-airport-prevailed-in-raavan-regime-4264114-PHO.html?&storyid=8248344&photoID=2072984
|title=ये हैं दुनिया के सबसे पुराने हवाई अड्डे जहां हनुमान जी ने मचा दी थी तबाही ! |accessmonthdayaccess-date= |accessdate= |last= न्यूज़|first=भास्कर |authorlink= |coauthors= |date=मई १५, २०१३ |year= |month= |format= |work= |publisher= |pages= |language= |archiveurl= |archivedate= |quote= }} </ref>
 
==ग्रन्थों में उल्लेख==
[[File:Sita Abduction.jpg|thumb|300px|[[मोढेरा]] स्थित सूर्य मंदिर के स्तम्भ में रावण द्वारा पुष्पक विमान से सीता हरण का दृश्य]]
===विमान निर्माण===
[[ऋगवेद]] में लगभग २०० से अधिक बार विमानों के बारे में उल्लेख दिया है। इसमें कई प्रकार के विमान जैसे तिमंजिला, [[त्रिभुज]] आकार के एवं तीन पहिये वाले, आदि विमानों का उल्लेख है। इनमें से कई विमानों का निर्माण [[अश्विनी कुमार|अश्विनी कुमारों]] ने किया था, जो दो जुड़वां देव थे, एवं उन्हें वैज्ञानिक का दर्जा प्राप्त था। इन में साधारणतया तीन यात्री जा सकते थे एवं उन के दोनो ओर पंख होते थे। इन उपकरणों के निर्माण में मुख्यतः तीन धातुओं- [[स्वर्ण]], [[रजत]] तथा [[लौह]] का प्रयोग किया गया था। वेदों में विमानों के कई आकार-प्रकार उल्लेखित किये गये हैं। उदाहरणतया अग्निहोत्र विमान में दो ऊर्जा स्रोत (ईंजन) तथा हस्ति विमान में दो से अधिक स्रोत होते थे। किसी विमान का रूप व आकार आज के [[किंगफिशर]] पक्षी के अनुरूप था।<ref name="ट्री"/> एक जलयान भी होता था जो वायु तथा जल दोनो में चल सकता था।<ref>([[ऋगवेद]] ६.५८.०३)</ref> कारा नामक विमान भी वायु तथा जल दोनो तलों में चल सकता था। <ref>(ऋग वेद 9.14.1)</ref> त्रिताला नामक विमान तिमंजिला था।<ref>(ऋग वेद 3.14.1)</ref> त्रिचक्र रथ नामक तीन पहियों वाला यह विमान आकाश में उड सकता था।<ref>(ऋग वेद 4.36.1)</ref> किसी रथ के जैसा प्कीरतीत होने वाला विमान वाष्प अथवा वायु की शक्ति से चलता था।<ref>(ऋग वेद 5.41.6)</ref> विद्युत-रथ नामक विमान विद्युत की शक्ति से चलता था।<ref>(ऋग वेद 3.14.1)</ref>
 
[[समरांगणसूत्रधार]] नामक ग्रन्थ में विमानों के बारे में तथा उन से सम्बन्धित सभी विषयों के बारे में अद्भुत ज्ञान मिलता है। ग्रन्थ के लगभग २२५ से अधिक पदों में इनके निर्माण, उड़ान, गति, सामान्य तथा आकस्मिक अवतरण तथा पक्षियों द्वारा दुर्घटनाओं की के बारे में भी उल्लेख मिलते हैं।<ref name="ट्री"/>
[[File:The Pushpak Aircraft.jpg|thumb|200px|left| चित्र रामायण में प्रदर्शित पुष्पक विमान]]
 
''मेघों के समान उच्च, स्वर्ण समान कान्तिमय, पुष्पक भूमि पर एकत्रित स्वर्ण के समान प्रतीत होता था। ढेरों रत्नों से विभूषित, अनेक प्रकार के पुष्पों से आच्छादित तथा पुष्प-पराग से भरे हुए पर्वत शिखर के समान शोभा पाता था। विधुन्मालाओं से पूजित मेघ के समान रमणी रत्नों से देदीप्यमान था। आकाश में विचरण करते हुए यह श्रेष्ठ हंसों द्वारा खींचा जाते हुए दिखाई देता था। इसका निर्माण अति सुन्दर ढंग से किया गया था, एवं अद्भुत शोभा से सम्पन्न दिखता था। इसके निर्माण में अनेक धातुओं का प्रयोग इस प्रकार से किया गया था कि यह पर्वत शिखर ग्रहों और चन्द्रमा के कारण आकाश और अनेक वर्णों से युक्त विचित्र शोभासम्पन्न दिखता था। उसका भूमि क्षेत्र स्वर्ण-मण्डित कृत्रिम पर्वतमालाओं से परिपूर्ण था। वहां अनेक पर्वत वृक्षों की विस्तृत पंक्तियों से हरे भरे रचे गए थे। इन वृक्षों पर पुष्पों का बाहुल्य था एवं ये पुष्प पंखुडियों से पूर्ण मण्डित थे। उसके अन्दर श्वेत वर्ण के भवन थे तथा उसे विचित्र वन और अद्भुत सरोवरों के चित्रों से सज्ज किया गया था। वह रत्नों की आभा से प्रकाशमान था एवं आवश्यकतानुसार कहीं भी भ्रमण करता था।''<ref>[http://www.jangidjagat.com/Jangidjagat/JangidDharm/VishwakarmaVimanNirman.aspx अतुलनीय पुष्पक विमान] {{हिन्दी}}। अभिगमन तिथि: २४ मई, २०१३।</ref>
 
इसकी शोभा अद्भुत थी जिसमें नाना प्रकार के रत्नों से अनेक रंगों के सर्पों का अंकन किया गया था, तथा अच्छी प्रजाति के सुन्दर अंग वाले अश्व भी बने थे। विमान पर अति-सुन्दर मुख एवं पंख वाले अनेक विंहगम चित्र बने थे, जो एकदम कामदेव के सहायक जान पड़ते थे। यहां गजों की सज्जा मूंगे और स्वर्ण निर्मित फूलों से युक्त थी तथा उन्होंने अपने पंखों को समेट रखा था, जो देवी लक्ष्मी का अभिषेक करते हुए से प्रतीत होते थे। उनके साथ ही वहां देवी लक्ष्मी की तेजोमय प्रतिमा भी स्थापित थी, जिनका उन गजों द्वारा अभिषेक हो रहा था। इस प्रकार सुन्दर कंदराओं वाले पर्वत के समान तथा बसंत ऋतु मे सुन्दर कोटरों वाले परम सुगंध युक्त वृक्ष के समान वह विमान बड़ा मनोहारी था।<ref name="ज्ञान"/>
 
इन विमानों के उड़ने व अवतरण हेतु लंका में छह विमानक्षेत्र थे।<ref name=""> {{cite web |url=http://www.delhitopnews.com/astro/the-history-of-this-gold-lanka/
|title= जानिए, इस सोने की लंका का इतिहास… |accessmonthdayaccess-date= |accessdate= |last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format= |work= |publisher= |pages= |language= |archiveurl= |archivedate= |quote= }} </ref><ref name="अवश्य"/>ये इस प्रकार से हैं:
* वेरागन्टोटा (वर्त्तमान श्रीलंका के महीयांगना): वेरागन्टोटा एक [[सिंहली भाषा]] का शब्द है, जिसका अर्थ होता है विमान के अवतरण का स्थल।
*[[थोटूपोला कांडा]] (वर्त्तमान होटोन प्लेन्स): थोटूपोला का शाब्दिक अर्थ विमानत्तल से ही है, याज़ि ऐसा स्थान, जहां से कोई अपनी यात्रा शुरू करता हो। कांडा का अर्थ है पर्वत। थोटूपोला कांडा सागर तल से छः हजार फीट की ऊंचाई पर एक समतल जमीन थी, जो विमान उत्तरण एवं अवतरण के लिये सटीक स्थान था।
* {{Youtube| https://www.youtube.com/watch?v=h28DR69Malg}}:पहला विमान किसका था? पुष्पक विमान रावण ...
* {{cite web |url= https://dharmalay.com/%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%95-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7/
|title= पुष्पक विमान बनाने की विधि |accessmonthdayaccess-date= |accessdate= |last= संचालक|first= धर्मालय |authorlink= |coauthors= |date= १४ मार्च, २०१५|year= |month= |format=
|work= |publisher=धर्मालय.काम |pages= |language= |archiveurl= |archivedate= |quote= }}
 
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