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== भूगोल ==
[[चित्र:Jog Rani.JPG|right|thumb|200px|[[जोग प्रपात]] भारत में सबसे ऊंचा [[जल प्रपात]] है। यहां [[शरावती नदी]] ऊंचाई से नीचे गिरती है। ]]
कर्नाटक राज्य में तीन प्रधान मंडल हैं: तटीय क्षेत्र [[करावली]], पहाड़ी क्षेत्र [[मालेनाडु]] जिसमें [[पश्चिमी घाट]] आते हैं, तथा तीसरा [[बयालुसीमी]] क्षेत्र जहां [[दक्खिन पठार]] का क्षेत्र है। राज्य का अधिकांश क्षेत्र बयालुसीमी में आता है और इसका उत्तरी क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा शुष्क क्षेत्र है।<ref name="arid">{{cite web|url=http://www.hinduonnet.com/fline/fl1817/18170420.htm|first=Parvathi |last=Menon|title=Karnataka's agony|work=The Frontline, Volume 18 - Issue 17, 18–31 अगस्त 2001|publisher=Frontline|accessdate=4 मई 2007-05-04}}</ref> कर्नाटक का सबसे ऊंचा स्थल [[चिकमंगलूर जिला|चिकमंगलूर जिले]] का मुल्लयनगिरि पर्वत है। यहां की [[समुद्र सतह से ऊंचाई]] {{convert|1929|m|ft|0}} है। कर्नाटक की महत्त्वपूर्ण नदियों में [[कावेरी]], [[तुंगभद्रा नदी]], [[कृष्णा नदी]], [[मलयप्रभा नदी]] और [[शरावती नदी]] हैं।
 
कृषि हेतु योग्यता के अनुसार यहां की मृदा को छः प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है: लाल, लैटेरिटिक, काली, ऍल्युवियो-कोल्युविलय एवं तटीय रेतीली मिट्टी। राज्य में चार प्रमुख ऋतुएं आती हैं। जनवरी और फ़रवरी में शीत ऋतु, उसके बाद मार्च-मई तक ग्रीष्म ऋतु, जिसके बाद जून से सितंबर तक वर्षा ऋतु (मॉनसून) और अंततः अक्टूबर से दिसम्बर पर्यन्त मॉनसूनोत्तर काल। मौसम विज्ञान के आधार पर कर्नाटक तीन क्षेत्रों में बांटा जा सकता है: तटीय, उत्तरी आंतरिक और दक्षिणी आंतरिक क्षेत्र। इनमें से तटीय क्षेत्र में सर्वाधिक वर्षा होती है, जिसका लगभग {{convert|3638.5|mm|in|abbr=on|0}} प्रतिवर्ष है, जो राज्य के वार्षिक औसत {{convert|1139|mm|in|abbr=on|0}} से कहीं अधिक है। [[शिमोगा जिला]] में [[अगुम्बे]] भारत में दूसरा सर्वाधिक वार्षिक औसत वर्षा पाने वाला स्थल है।<ref name="second">अगुम्बे के सर्वाधिक वर्षा पाने का उल्लेख {{cite web|url=http://www.centralchronicle.com/20070328/2803302.htm|title=लिंक गोदावरी, कृष्णा & कावेरी|first=अरबिन्द | last=घोष|work=द सेन्ट्रल क्रॉनिकल, दि:२८ मार्च २००७|publisher=२००७, सेन्ट्रल क्रॉनिकल |accessdate=१६ मई २००७}}</ref> द्वारा किया गया है। यहां का सर्वाधिक अंकित तापमान ४५.६ [[सेल्सियस|° से.]] (११४ [[फ़ैरन्हाइट|°फ़ै.]]) [[रायचूर]] में तथा न्यूनतम तापमान {{convert|2.8|°C|°F|abbr=on|0}} [[बीदर]] में नापा गया है।
कर्नाटक की लगभग ५६% जनसंख्या कृषि और संबंधित गतिविधियों में संलग्न है।<ref name="excel">{{cite web|url=http://planningcommission.nic.in/plans/stateplan/sdr_pdf/shdr_kar05.pdf|title= कर्नाटक ह्यूमन डवलपमेंट रिपोर्ट २००५ |work=योजना आयोग |publisher=भारत सरकार|accessdate=४ जून २००७|format=पीडीएफ़}}</ref> राज्य की कुल भूमि का ६४.६%, यानि १.२३१ करोड़ हेक्टेयर भूमि कृषि कार्यों में संलग्न है।<ref name="stats">{{cite web|url=http://raitamitra.kar.nic.in/Agri%20Policy%20Eng.pdf|title=कर्नाटक एग्रीकल्चरल पॉलिसी २००६|work=कृषि विभाग |publisher=कर्नाटक सरकार|accessdate=४ जून २००७|format=पीडीएफ़}}</ref> यहाँ के कुल रोपित क्षेत्र का २६.५% ही सिंचित क्षेत्र है। इसलिए यहाँ की अधिकांश खेती [[मानसून|दक्षिण-पश्चिम मानसून]] पर निर्भर है।<ref name="stats"/> यहाँ भारत के [[सार्वजनिक क्षेत्र]] के अनेक बड़े उद्योग स्थापित किए गए हैं, जैसे [[हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड]], [[नेशनल एरोस्पेस लैबोरेटरीज़]], [[भारत हैवी एलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड]], [[इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज़]], [[भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड]] एवं [[हिन्दुस्तान मशीन टूल्स]] आदि जो बंगलुरु में ही स्थित हैं। यहाँ भारत के कई प्रमुख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अनुसंधान केन्द्र भी हैं, जैसे [[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन]], [[केन्द्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान]], [[भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड]] एवं [[केन्द्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान]]। [[मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकैमिकल्स लिमिटेड]], [[मंगलोर]] में स्थित एक तेल शोधन केन्द्र है।
 
१९८० के दशक से कर्नाटक (विशेषकर बंगलुरु) [[सूचना प्रौद्योगिकी]] के क्षेत्र में विशेष उभरा है। वर्ष २००७ के आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक से लगभग २००० आई.टी फर्म संचालित हो रही थीं। इनमें से कई के मुख्यालय भी राज्य में ही स्थित हैं, जिनमें दो सबसे बड़ी आई.टी कंपनियां [[इन्फोसिस]] और [[विप्रो]] हैं।<ref name="it" /> इन संस्थाओं से निर्यात रु. ५०,००० करोड़ (१२.५ बिलियन) से भी अधिक पहुंचा है, जो भारत के कुल सूचना प्रौद्योगिकी निर्यात का ३८% है।<ref name="it">{{cite web|url=http://www.financialexpress.com/old/fe_full_story.php?content_id=164868|work=द फ़ाइनेन्शियल एक्स्प्रेस, २२ मई २००७|title=आईटी एक्स्पोर्ट्स फ़्रॉम कर्नाटक एक्सीड्स रु.५०के करोड़ |publisher=२००७: इण्डियन एक्स्प्रेस न्यूज़पेपर (मुंबई) लि.|accessdate=५ जून २००७}}</ref> [[देवनहल्ली]] के बाहरी ओर का [[नंदी हिल]] क्षेत्र में ५० वर्ग कि.मी भाग, आने वाले २२ बिलियन के [[ब्याल आईटी निवेश क्षेत्र]] की स्थली है। ये कर्नाटक की मूल संरचना इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी परियोजना है।<ref>[http://www.hindu.com/2010/01/29/stories/2010012953620400.htm स्टेट कैबिनेट अप्रूव्स आई.टी पार्क नियर देवनहल्ली एयरपोर्ट]। द हिन्दू। २९ जनवरी २०१०। विशेष संवाददाता</ref> इन सब कारणों के चलते ही बंगलौर को भारत की सिलिकॉन घाटी कहा जाने लगा है।<ref name="business">{{cite web|url=http://www.indiainbusiness.nic.in/know-india/states/karnataka.htm|work=Ministry of External affairs|title=India in Business|publisher=भारत सरकार|accessdate=2007-06-11 जून 2007}}</ref>
 
[[चित्र:GSDP hindi.JPG|right|thumb|आर्थिक प्रगति में क्षेत्रवार योगदान]]
[[चित्र:Kingfisher Airlines Airbus A320-200.jpg|right|thumb|[[किंगफिशर एयरलाइंस]] [[बंगलुरु विमानक्षेत्र|बंगलुरु]] में आधारित विमानसेवा है।]]
 
कर्नाटक में वायु यातायात देश के अन्य भागों की तरह ही बढ़ता हुआ किंतु कहीं उन्नत है। कर्नाटक राज्य में [[बंगलुरु विमानक्षेत्र|बंगलुरु]], [[मंगलौर विमानक्षेत्र|मंगलौर]], [[हुबली विमानक्षेत्र|हुबली]], [[बेलगाम विमानक्षेत्र|बेलगाम]], हम्पी एवं [[बेल्लारी विमानक्षेत्र]] में विमानक्षेत्र हैं, जिनमें [[बंगलुरु विमानक्षेत्र|बंगलुरु]] एवं [[मंगलौर विमानक्षेत्र|मंगलौर]] अंतर्राष्ट्रीय [[विमानक्षेत्र]] हैं। मैसूर, गुलबर्ग, बीजापुर, हस्सन एवं शिमोगा में भी २००७ से प्रचालन कुछ हद तक आरंभ हुआ है।<ref name=5airports>{{cite web|url=http://web.archive.org/web/20071012193016/http://deccanherald.com/Content/Jun52007/district200706045625.asp|accessdate=5 जून 2007-06-05|title=५ एयरपोर्ट्स टू बी ऑपरेश्नल सून|work=डेक्कन हेराल्ड, ऑनलाइन; तिथि: ५ जून २००७|publisher=२००७, द प्रिंटर्स (मैसूर) प्रा.लि.|accessdate=२९ जून २००७}}</ref> यहां चालू प्रधान वायुसेवाओं में [[किंगफिशर एयरलाइंस]] एवं [[एयर डेक्कन]] हैं, जो बंगलुरु में आधारित हैं।
 
कर्नाटक का रेल यातायात जाल लगभग {{convert|3089|km|mi|0}} लंबा है। २००३ में हुबली में मुख्यालय सहित [[दक्षिण पश्चिम रेलवे|दक्षिण पश्चिमी रेलवे]] के सृजन से पूर्व राज्य [[दक्षिण रेलवे|दक्षिणी]] एवं [[पश्चिमी रेलवे]] मंडलों में आता था। अब राज्य के कई भाग दक्षिण पश्चिमी मंडल में आते हैं, व शेष भाग दक्षिण रेलवे मंडल में आते हैं। तटीय कर्नाटक के भाग [[कोंकण रेलवे]] नेटवर्क के अंतर्गत आते हैं, जिसे भारत में इस शताब्दी की सबसे बड़ी रेलवे परियोजना के रूप में देखा गया है।<ref name="konkan">{{cite web|url=http://pib.nic.in/archieve/lreleng/lyr98/l0498/PIBR220498.html|title=प्राइम मिनिस्टर टू डेडिकेट कोंकण रेलवे लाइन टू द नेशन ऑन १ मई|work=पी.आई.बी|publisher=भारत सरकार|accessdate=2007-07-18 जुलाई 2007}}</ref> बंगलुरु अन्तर्राज्यीय शहरों से रेल यातायात द्वारा भली-भांति जुड़ा हुआ है। राज्य के अन्य शहर अपेक्षाकृत कम जुड़े हैं।<ref name="rail1">{{cite web|url=http://www.deccanherald.com/archives/dec252006/state143720061225.asp|title=पायलट प्रोजेक्ट: जीपीएस सिस्टम ऑन बंगलौर-हुबली जन शताब्दी|work=डेकन हेराल्ड, ऑनलाइन, ति:२५, दिसम्बर, २००६|publisher=२००५, द प्रिंटर्स (मैसूर) प्रा.लि. |accessdate=६ मई २००७}}</ref><ref name="rail2">{{cite web|url=http://www.ourkarnataka.com/issues/karnataka_railways.htm|author=जी.एस. प्रसन्न कुमार|title=कर्नाटक एण्ड इण्डियन रेलवेज़, Colossal wastage of available resources or is it sheer madness of the authorities concerned|work=ऑनलाईन वेबपेज:OurKarnataka.com|publisher=OurKarnataka.Com, इंका|accessdate=2007-04-20 अप्रैल 2007}}</ref>
 
कर्नाटक में ११ जहाजपत्तन हैं, जिनमें मंगलौर पोर्ट सबसे नया है, जो अन्य दस की अपेक्षा सबसे बड़ा और आधुनिक है।<ref name="ports">{{cite web|url=http://www.karnatakaports.in/our_ports.htm|title=माइनर पोर्ट्स ऑफ कर्नाटक|work=Online Webpage of Karnataka Ports Department|publisher=कर्नाटक सरकार|accessdate=6 मई 2007-05-06}}</ref> मंगलौर का नया पत्तन भारत के नौंवे प्रधान पत्तन के रूप में [[४ मई]], [[१९७४]] को राष्ट्र को सौंपा गया था। इस पत्तन में वित्तीय वर्ष २००६-०७ में ३ करोड़ २०.४ लाख टन का निर्यात एवं १४१.२ लाख टन का आयात व्यापार हुआ था। इस वित्तीय वर्ष में यहां कुल १०१५ जलपोतों की आवाजाही हुई, जिसमें १८ क्यूज़ पोत थे। राज्य में अन्तर्राज्यीय जलमार्ग उल्लेखनीय स्तर के विकसित नहीं हैं।<ref name="पोर्ट्स">[http://www.karnatakaports.in/ कर्नाटक पोर्ट्स.इन]</ref>
 
कर्नाटक के राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों की कुल लंबाइयां क्रमशः {{convert|3973|km|mi|0}} एवं {{convert|9829|km|mi|0}} हैं। [[कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम]] (के.एस.आर.टी.सी) राज्य का सरकारी लोक यातायात एवं परिवहन निगम है, जिसके द्वारा प्रतिदिन लगभग २२ लाख यात्रियों को परिवहन सुलभ होता है। निगम में २५,००० कर्मचारी सेवारत हैं।<ref name="ksrtc">{{cite web|url=http://web.archive.org/web/20080822211002/http://ksrtc.in/about_ksrtc.htm|title=अबाउट के.एस.आर.टी.सी|work=ऑनलाइन वेबपेज KSRTC|publisher=KSRTC|accessdate=6 मई 2007-05-06}}</ref> १९९० के दशक के अंतिम दौर में निगम को तीन निगमों में विभाजित किया गया था, बंगलौर मेट्रोपॉलिटन ट्रांस्पोर्ट कार्पोरेशन, नॉर्थ-वेस्ट कर्नाटक ट्रांस्पोर्ट कार्पोरेशन एवं नॉर्थ-ईस्ट कर्नाटक ट्रांस्पोर्ट कार्पोरेशन। इनके मुख्यालय क्रमशः बंगलौर, हुबली एवं गुलबर्ग में स्थित हैं।<ref name="ksrtc"/>
 
== संस्कृति ==
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