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[[चित्र:Indira Gandhi 1966.jpg|right|thumb|200px|प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, जिन्होंने भारत के राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करवाई।]]
[[चित्र:Indira Gandhi 1966.jpg|right|thumb|200px| ]]
 
(Jai Prakash)
 
आपातकाल 25 जून 1975 के मध्य रात्रि को इंदिरा गांधी के कहने पर फखरुद्दीन अली अहमद के द्वारा जो कि उस समय के राष्ट्रपति थे आपातकाल लगवाया गया भारत के लोकतंत्र के लिए एक यह काला धब्बा था इस समय पूरा भारत का लोकतंत्र केवल इंदिरा गांधी के मुट्ठी में बंद हो गया था
 
Book Knowledge Class-12
 
(1)विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया
(2)प्रेस पर सेंसरशिप लागू कर दी गई
(3)राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जमात ए इस्लामी पर प्रतिबंध
(4)धरना प्रदर्शन हड़ताल पर रोक
(5)नागरिकों के मौलिक अधिकार निष्प्रभावी कर दिए गए
(6)सरकार ने निवारक नजरबंदी कानून के द्वारा राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया
(7)सेमिनार और मेंस्ट्रीम जैसी पत्रिकाओं ने प्रकाशन बंद कर दिया था
(8)कन्नड़ लेखक शिवराम तथा हिंदी लेखक फणीश्वर नाथ रेनू ने आपातकाल के विरोध में अपनी पदवी सरकार को लौटा दी
 
अतः इन बातों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि आपातकाल भारत के लोकतंत्र में एक काला धब्बा था जो कि इंदिरा गांधी ने अपने स्वार्थ के लिए लगवाया था फखरुद्दीन अली अहमद जो उस समय के राष्ट्रपति थे उनके द्वारा अधिक जानकारी के लिए आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं All Cbse Education in Hindi
 
 
26 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक का 21 महीने की अवधि में [[भारत]] में [[आपातकाल]] घोषित था। तत्कालीन [[भारत के राष्ट्रपति|राष्ट्रपति]] [[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]] ने तत्कालीन भारतीय [[भारत के प्रधानमंत्री|प्रधानमंत्री]] [[इन्दिरा गांधी]] के कहने पर [[भारतीय संविधान]] की धारा 352 के अधीन '''आपातकाल''' की घोषणा कर दी। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादास्पद और अलोकतांत्रिक काल था। आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए तथा नागरिक अधिकारों को समाप्त करके मनमानी की गई। इंदिरा गांधी के राजनीतिक विरोधियों को कैद कर लिया गया और प्रेस पर प्रतिबंधित कर दिया गया। प्रधानमंत्री के बेटे [[संजय गांधी]] के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर [[पुरुष नसबंदी]] अभियान चलाया गया। [[जयप्रकाश नारायण]] ने इसे 'भारतीय इतिहास की सर्वाधिक काली अवधि' कहा था।
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