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[[ईसाई धर्म]], [[इस्लाम]] तथा [[यहूदी धर्म]] को संयुक्त रूप से ''इब्राहिमी धर्म'' भी कहते हैं क्योंकि इब्राहम तीनों धर्म के मूल में हैं।
 
यहूदी जाति के आदि संस्थापक अबराहम[[अब्राहम]] को अपने स्वतंत्र विचारों के कारण दर-दर की खाक छाननी पड़ी। अपने जन्मस्थान ऊर (सुमेर का प्राचीन नगर) से सैकड़ों मील दूर निर्वासन में ही उनकी मृत्यु हुर्ह। अबराहम के बाद यहूदी इतिहास में सबसे बड़ा नाम [[मूसा]] का है। मूसा ही यहूदी जाति के मुख्य व्यवस्थाकार या स्मृतिकार माने जाते हैं। मूसा के उपदेशों में दो बातें मुख्य हैं : एक-अन्य देवी देवताओं की पूजा को छोड़कर एक निराकार ईश्वर की उपासना और दूसरी- सदाचार के दस नियमों का पालन। मूसा ने अनेकों कष्ट सहकर ईश्वर के आज्ञानुसार जगह-जगह बँटी हुई अत्याचारपीड़ित यहूदी जाति को मिलकार एक किया और उन्हें फ़िलिस्तीन में लाकर बसाया। यह समय ईसा से प्राय: 1,500 वर्ष पूर्व का था। मूसा के समय से ही यहूदी जाति के विखरे हुए समूह स्थायी तौर पर फ़िलिस्तीन में आकर बसे और उसे अपना देश समझने लगे। बाद में अपने इस नए देश का उन्होंने "इज़रायल" की संज्ञा दी।
 
अबराहम[[अब्राहम]] ने यहूदियों का उत्तरी अरब और ऊर से फ़िलिस्तीन की ओर संक्रमण कराया। यह उनका पहला संक्रमण था। दूसरी बार जब उन्हें मिस्र छोड़ फ़िलिस्तीन भागना पड़ा तब उनके नेता हज़रत मूसा थे (प्राय: 16वीं सदी ई.पू.)। यह यहूदियों का दूसरा संक्रमण था जो ''[[महान् बहिरागमन]]'' (ग्रेट एग्ज़ोडस) के नाम से प्रसिद्ध है।
 
अबराहम[[अब्राहम]] और [[मूसा]] के बाद इज़रायल में जो दो नाम सबसे अधिक आदरणीय माने जाते हैं वे दाऊद (ईसाइयत में David) और उसके बेटे सुलेमान (ईसाइयत में Solomons) के हैं। सुलेमान के समय दूसरे देशों के साथ इज़रायल के व्यापार में खूब उन्नति हुई। सुलेमान ने समुद्रगामी जहाजों का एक बहुत बड़ा बेड़ा तैयार कराया और दूर-दूर के देशों के साथ तिजारत शुरु की। अरब, एशिया कोचक, अफ्रीका, यूरोप के कुछ देशों तथा भारत के साथ इज़रायल की तिजारत होती थी। सोना, चाँदी, हाथीदाँत और मोर भारत से ही इज़रायल आते थे। सुलेमान उदार विचारों का था। सुलेमान के ही समय इबरानी यहूदियों की राष्ट्रभाषा बनी। 37 वर्ष के योग्य शासन के बाद सन् 937 ई.पू. में सुलेमान की मृत्यु हुई।
[[चित्र:Kingdoms of Israel and Judah map 830.svg|right|thumb|300px|८३० ईसा पूर्व में इजराइल और जूदा (यहूदा) राज्य]]
[[सुलेमान]] की मृत्यु से यहूदी एकता को बहुत बड़ा धक्का लगा। सुलेमान के मरते ही इज़रायली और जूदा (यहूदा) दोनों फिर अलग-अलग स्वाधीन रियासतें बन गईं। सुलेमान की मृत्यु के बाद 50 वर्ष तक इज़रायल और जूदा के आपसी झगड़े चलते रहे। इसके बाद लगभग 884 ई.पू. में [[उमरी]] नामक एक राजा इज़रायल की गद्दी पर बैठा। उसने फिर दोनों शाखों में प्रेमसंबंध स्थापित किया। किंतु उमरी की मृत्यु के बाद यहूदियों की ये दोनों शाखें सर्वनाशी युद्ध में उलझ गईं।
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