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अधिकाँश गैलेक्सियों का केंद्र तारों से भरा हुआ गोलाकार भाग होता है, जिसे [[नाभिक]] कहा जाता है और यह नाभिक अपने चारों ओर एक तलीय गोलाकार डिस्क से जुडा होता है। [[खगोलविज्ञान|खगोलविज्ञानी]] गैलेक्सियों को उनके आकार के आधार पर मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित करतें है। यह कोई नहीं जानता कि क्यों गैलेक्सियाँ एक निश्चित रूप धारण करती है। शायद यह गैलेक्सियों के घूर्णन के वेग और उसमे स्थित तारों के बनने कि गति पर निर्भर करता है।
 
==omrajak हमारी गैलेक्सी ==
हमारी गैलेक्सी (जिसमें हमारी पृथ्वी है) की चौड़ाई और चमक सर्वत्रसमान नहीं है। धनु (सैजिटेरियस) तारामंडल में यह सबसे अधिक चौड़ी और चमकीली है। दूरदर्शी से देखने पर गैलेक्सी में असंख्य तारे दिखाई पड़ते हैं। विभिन्न चमक के तारों की संख्या गिनकर, उनकी दूरी की गणना कर और उनकी गति नापकर ज्योतिषियों ने गैलेक्सी के वास्तविक रूप का बहुत अच्छा अनुमान लगा लिया है। यदि आकाश में दिखाई पड़नेवाले रूप के बदले त्रिविमतीय अवकाश (स्पेस) में गैलेक्सी के रूप पर विचार किया जाए तो पता चलता है कि गैलेक्सी लगभग समतल वृत्ताकार पहिए के समान है जिसकी धुरी के पास का भाग कुछ फूला हुआ है। चित्र में गैलेक्सी का बगल से चित्र दिखाया गया है (ऊपर से देखने पर गैलेक्सी पूर्ण वृत्ताकार दिखाई पड़ेगी)। इस पहिए का व्यास लगभग एक लाख [[प्रकाश वर्ष|प्रकाशवर्ष]] है (१ प्रकाशवर्ष=५.९´१०१२) मील या पृथ्वी से सूर्य की दूरी का ६३ हजार गुना) और मोटाई ३,००० से ६,००० प्रकाशवर्ष के बीच है। केंद्र के पास की मोटाई लगभग १५,००० प्रकाशवर्ष है। हमारी गैलेक्सी में तारे समान रूप से वितरित नहीं हैं। बीच बीच में अनेक तारागुच्छ हैं और इसकी भी संभावना है कि देवयानी (ऐंड्रोमीडा) नीहारिका के समान हमारी गैलेक्सी में भी सर्पिल कुंडलियाँ (स्पाइरल आर्म्स) हों। तारों के बीच में सूक्ष्म धूलि और गैस फैली हैं, जो दूर के तारों का प्रकाश क्षीण कर देती हैं। धूलि और गैस का घनत्व संस्था के मध्यतल में अधिक है। कहीं कहीं धूलि के घने बादल हो जाने से काली नीहारिकाएँ बन गई हैं। कहीं गैस के बादल पास के तारों के प्रकाश से उद्दीप्त होकर चमकती नीहारिका के रूप में दिखाई पड़ते हैं। हमारी गैलेक्सी का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का लगभग एक खरब (१०११) गुना है। इसमें से प्राय: आधा तो तारों का द्रव्यमान है और आधा धूलि और गैस का।
 
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